पटना, 24 अक्टूबर 2026 : बिहार में भाजपा से नाराज सवर्णों पर कांग्रेस दांव खेलने की तैयारी में जुट गई है। ये वो वोट बैंक है, जो कभी कांग्रेस के साथ हुआ करता था, मगर हाल के बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार के पीछे सवर्णों की ही नाराजगी सामने आई थी। अब इन्हें अपने पाले में करने के लिए कांग्रेस ने दिल्ली से अपने टॉप नेता को पटना बुलाया है। मौका होगा बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्री बाबू (श्रीकृष्ण सिंह) की जयंती का। इस तरह सवर्ण वोटरों को लेकर सियासी हलचल तेज होने के बीच कांग्रेस ने अपनी रणनीति के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे रविवार यानी 25 अक्टूबर को पटना पहुंचेंगे। वह श्री बाबू की जयंती के अवसर पर आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम पटना के बापू सभागार में आयोजित किया जाएगा। राजनीतिक नजरिये से इस कार्यक्रम को कांग्रेस के पुराने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी श्री बाबू की विरासत, सामाजिक न्याय और बिहार के विकास में उनके योगदान को सामने रखकर अपने संदेश को व्यापक बनाने की तैयारी में है।

25 अक्टूबर को पटना पहुंचेंगे मल्लिकार्जुन खरगे

बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम की जानकारी दी। कार्यक्रम के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष 25 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजे पटना पहुंचेंगे और इसके बाद बापू सभागार में आयोजित समारोह में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के जुटने की संभावना है। पार्टी का कहना है कि समारोह के माध्यम से श्री बाबू के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक योगदान को याद किया जाएगा।

कौन थे श्री बाबू, जिनकी जयंती पर कांग्रेस कर रही बड़ा आयोजन ?

डॉ. श्रीकृष्ण सिंह बिहार के पहले मुख्यमंत्री थे। उन्हें बिहार केसरी के नाम से भी जाना जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका और आजादी के बाद बिहार के विकास में उनके योगदान को याद किया जाता है। कांग्रेस नेताओं ने श्री बाबू के शासनकाल में हुए सामाजिक सुधारों, जमींदारी प्रथा के उन्मूलन और दलितों के मंदिर प्रवेश से जुड़े प्रयासों का उल्लेख किया है। पार्टी इन ऐतिहासिक प्रसंगों के जरिए सामाजिक समानता और समावेशी विकास के अपने संदेश को सामने रखना चाहती है।

सवर्ण वोटरों पर कांग्रेस की नजर क्यों ?

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। कांग्रेस का एक समय सवर्ण समुदाय के बीच मजबूत आधार था, लेकिन बाद के दशकों में राज्य की राजनीति और गठबंधनों में बदलाव के साथ पार्टी के सामाजिक समीकरण भी बदले। अब श्री बाबू की जयंती पर आयोजित समारोह को कांग्रेस की विरासत और पुराने सामाजिक आधार को फिर से मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से इस कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। हालांकि, किसी एक कार्यक्रम के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि सवर्ण वोटरों का रुझान बड़े पैमाने पर बदल रहा है। इसके लिए चुनावी नतीजों, क्षेत्रवार मतदान और मतदाताओं के रुझान जैसे तथ्यों का विश्लेषण जरूरी होगा।

UGC और SC-ST एक्ट को लेकर भाजपा से नाराजगी का दावा

राजनीतिक चर्चा में UGC से जुड़े मुद्दों और SC-ST एक्ट को लेकर सवर्ण समुदाय के कुछ वर्गों की नाराजगी का जिक्र किया जा रहा है। कांग्रेस के लिए यह अपने पुराने समर्थक वर्ग तक पहुंचने का अवसर माना जा रहा है। हालांकि पूरे सवर्ण समुदाय को किसी एक राजनीतिक दल से नाराज बताना सही नहीं होगा। अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों में राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं। इसलिए कांग्रेस की रणनीति का वास्तविक असर आगामी चुनावों और मतदाताओं की प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट होगा।

क्या बिहार में अपना पुराना वोट बैंक वापस पा सकेगी कांग्रेस ?

श्री बाबू की जयंती के बहाने कांग्रेस बिहार में अपनी ऐतिहासिक राजनीतिक विरासत को फिर से चर्चा में ला रही है। खरगे की मौजूदगी और वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी से पार्टी संगठन को मजबूती देने की कोशिश भी दिखाई देती है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस आयोजन को राजनीतिक समर्थन में बदल पाएगी और क्या पार्टी बिहार में अपने पुराने सामाजिक आधार को दोबारा मजबूत कर सकेगी? इसका जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम और चुनावी नतीजों से मिलेगा।