नई दिल्ली/अहमदाबाद, 24 अगस्त 2026 : भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के मौके पर बताया कि भारत 2035 तक अपना स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत वर्ष 2028 में पहले मॉड्यूल के लॉन्च के साथ होगी।
2028 में लॉन्च होगा पहला मॉड्यूल
इसरो प्रमुख वी. नारायणन के मुताबिक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाएगा। इस योजना के तहत स्टेशन का पहला प्राथमिक मॉड्यूल BAS-1 वर्ष 2028 तक अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी है। इसके बाद अलग-अलग मॉड्यूल जोड़कर वर्ष 2035 तक पूर्ण विकसित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तैयार किया जाएगा। प्रस्तावित स्टेशन का वजन करीब 52 टन होगा और इसे पृथ्वी से लगभग 400 किलोमीटर ऊपर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया जाएगा।
अंतरिक्ष यात्री 15 से 20 दिन कर सकेंगे शोध
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के तैयार होने के बाद यहां भारतीय अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रहकर वैज्ञानिक प्रयोग और शोध कर सकेंगे। इसरो के मुताबिक, अंतरिक्ष यात्री स्टेशन पर करीब 15 से 20 दिनों तक रह सकते हैं। यह स्टेशन भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन और अंतरिक्ष विज्ञान अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
पीएम मोदी ने स्पेस सेक्टर को लेकर क्या कहा ?
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के बढ़ते Space Sector और स्टार्टअप इकोसिस्टम की भी चर्चा की। स्पेस स्टार्टअप्स के सीईओ से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय स्टार्टअप दुनिया भर की प्रतिभाओं को भारत की ओर आकर्षित कर सकते हैं। उनका कहना था कि देश में ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए कि दुनिया के लोगों को लगे कि अगर उन्हें अपना भविष्य बनाना है तो भारत आना चाहिए और यहां के स्टार्टअप्स से जुड़ना चाहिए।
गगनयान मिशन पर भी बड़ा अपडेट
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने हालिया PSLV मिशन की असफलता को संगठन के बेहतरीन रिकॉर्ड में एक अपवाद बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विफलता का गगनयान मिशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत लगातार मानव अंतरिक्ष उड़ान, अंतरिक्ष स्टेशन और डीप-स्पेस मिशनों की दिशा में अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए क्यों अहम है यह योजना ?
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण से देश को अंतरिक्ष में लंबे समय तक मानव उपस्थिति बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके जरिए वैज्ञानिकों को माइक्रोग्रैविटी में प्रयोग करने, नई तकनीकों का परीक्षण करने और मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी क्षमताओं को विकसित करने का अवसर मिलेगा। 2028 में पहला मॉड्यूल और 2035 तक पूरा स्टेशन—भारत का यह स्पेस मिशन देश को अंतरिक्ष अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में नई ऊंचाई तक ले जाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।




