नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026 : केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब देश में 100% एथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के इस्तेमाल को सरकार ने मंजूरी दे दी है। मालूम हो कि इस फ्यूल का इस्तेमाल उन वाहनों में ही किया जा सकता है, जो इसके लिए खासतौर पर डिजाइन और सर्टिफाइड किए गए हों। यह फैसला कुछ कार कंपनियों के E100 कारों को बाजार में लॉन्च करने से ठीक पहले आया है। केंद्र सरकार ने इसके लिए गजट नोटिफिकेशन जारी कर सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में बदलाव किया है। इसके तहत अब इस ईंधन को इस्तेमाल करने वाले खास तौर पर डिजाइन और प्रमाणित वाहनों के लिए प्रावधान किया गया है। इस तरह सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन किया है। इसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है, मगर इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा पेट्रोल कारों में सीधे E100 फ्यूल भरा जा सकता है।
E100 फ्यूल क्या है ?
E100 ऐसा ईंधन है, जिसमें एथेनॉल का अनुपात 100% होता है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे गन्ना, मक्का और दूसरे जैविक स्रोतों से तैयार किया जा सकता है। इसके विपरीत, सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण अलग-अलग अनुपात में हो सकता है। एथेनॉल को परिवहन क्षेत्र में वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक पर्यावरणीय लाभ एथेनॉल के उत्पादन, कच्चे माल और पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर भी निर्भर करता है।
9 सवाल-जवाब में समझें सरकार के फैसले का मतलब
1. सरकार ने क्या मंजूरी दी है ?
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन करते हुए E100 फ्यूल से चलने वाले वाहनों के लिए नियामकीय प्रावधान जोड़े हैं। इससे ऐसे वाहनों के निर्माण और प्रमाणन का रास्ता स्पष्ट हो सकता है।
2. क्या E100 में पेट्रोल मिलाया जाता है ?
E100 का मतलब लगभग 100% एथेनॉल वाला ईंधन है। इसमें पेट्रोल का मिश्रण नहीं होता। एथेनॉल को गन्ने और मक्का जैसे स्रोतों से बनाया जा सकता है।
3. क्या मौजूदा पेट्रोल कार में E100 डलवा सकते हैं?
नहीं। सामान्य पेट्रोल या E20 के लिए तैयार गाड़ियों में सीधे E85 या E100 का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इन ईंधनों के लिए इंजन, फ्यूल सिस्टम और अन्य संबंधित हिस्सों का अनुकूल होना जरूरी है। ईंधन का इस्तेमाल वाहन निर्माता की मंजूरी और प्रमाणन के अनुसार ही करें।
4. क्या मौजूदा कार मालिकों को गाड़ी बदलनी पड़ेगी ?
नहीं। इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा पेट्रोल कार मालिकों को अपनी गाड़ी बदलनी होगी या उसमें मॉडिफिकेशन कराना पड़ेगा। उन्हें अपने वाहन के लिए निर्धारित ईंधन का ही इस्तेमाल करना चाहिए।
5. क्या सामान्य पेट्रोल कारें बंद हो जाएंगी ?
रिपोर्ट में इस बदलाव को वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में बताया गया है। केवल E100 वाहनों को मंजूरी मिलने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सामान्य पेट्रोल कारें बंद हो जाएंगी।
6. फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक क्या है ?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसी तकनीक से लैस होते हैं, जिनमें इंजन और फ्यूल सिस्टम को पेट्रोल व एथेनॉल के निर्धारित मिश्रणों के अनुकूल बनाया जाता है। ऐसे वाहनों में अलग-अलग अनुपात वाले ईंधन का इस्तेमाल उनकी तकनीकी क्षमता और निर्माता के निर्देशों के अनुसार किया जा सकता है। हर फ्लेक्स-फ्यूल वाहन E100 पर चलने में सक्षम हो, यह जरूरी नहीं है। वाहन की प्रमाणित ईंधन सीमा देखना महत्वपूर्ण है।
7. E100 फ्यूल वाली गाड़ियां कौन चला सकेगा ?
ऐसे वाहन जिनके निर्माता ने E100 के इस्तेमाल के लिए इंजन और फ्यूल सिस्टम डिजाइन किए हों तथा जिन्हें संबंधित मानकों के तहत प्रमाणित किया गया हो। केवल E100 फ्यूल की मंजूरी से यह नहीं माना जाना चाहिए कि बाजार में ऐसी गाड़ियां हर जगह उपलब्ध हो गई हैं।
8. E100 फ्यूल से भारत को क्या फायदे हो सकते हैं ?
सरकार के मुताबिक, इसके दो प्रमुख संभावित फायदे हैं :
- कच्चे तेल के आयात में कमी : घरेलू स्तर पर उत्पादित एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है।
- प्रदूषण घटाने की संभावना : एथेनॉल के इस्तेमाल से कुछ प्रकार के उत्सर्जन में कमी आ सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ इंजन, वाहन तकनीक व ईंधन उत्पादन की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
9. क्या दूसरे देशों में भी फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक इस्तेमाल होती है ?
हां। ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का इस्तेमाल होता है। वहां एथेनॉल मिश्रित ईंधन का भी उपयोग किया जाता है। इन देशों के अनुभव से भारत में वैकल्पिक ईंधन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सीख मिल सकती है।
आम लोगों के लिए सबसे जरूरी बात
E100 फ्यूल को लेकर नियमों में बदलाव वैकल्पिक ईंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है लेकिन इसका सीधा असर हर पेट्रोल कार पर नहीं पड़ेगा। वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी के मैनुअल में दिए गए निर्देशों के अनुसार ही ईंधन चुनना चाहिए।




