ब्रासीलिया, 26 अक्टूबर 2026। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने दूसरे दौर के मतदान में दक्षिणपंथी नेता और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ किया है। चुनावी नतीजों के मुताबिक लूला को 51.79% और फ्लावियो को 48.21% वैध वोट मिले। लूला का नया कार्यकाल पांच जनवरी 2027 से शुरू होगा। यह जीत इसलिए खास है, क्योंकि पहले दौर में लूला अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे थे। दूसरे दौर में उन्होंने मुकाबला पलट दिया। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के आधुनिक इतिहास में यह पहली बार हुआ कि पहले दौर में दूसरे स्थान पर रहने वाला उम्मीदवार अंतिम दौर में जीतकर राष्ट्रपति बना।
पहले दौर में पिछड़े, दूसरे दौर में पलटी बाजी
चार अक्टूबर को हुए पहले दौर के मतदान में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03% और लूला को 45.16% वोट मिले थे। चूंकि किसी भी उम्मीदवार को 50% से अधिक वैध वोट नहीं मिले, इसलिए शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच दूसरे दौर का मतदान कराया गया। 25 अक्टूबर को हुए दूसरे दौर में लूला ने बढ़त हासिल कर ली। अंतिम नतीजों में उन्हें 64.25 मिलियन से अधिक वोट मिले, जबकि फ्लावियो को करीब 59.83 मिलियन वोट प्राप्त हुए। दोनों के बीच अंतर लगभग 44.3 लाख वोटों का रहा।
कौन हैं लूला दा सिल्वा ?
80 वर्षीय लूला ब्राजील की राजनीति के सबसे चर्चित नेताओं में शामिल हैं। वे पहली बार 2002 में राष्ट्रपति चुने गए और 2006 में दोबारा जीतकर 2010 तक पद पर रहे। 2022 के चुनाव में उन्होंने फ्लावियो के पिता और तत्कालीन राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को हराया था। 2026 की जीत के साथ वे चौथी बार राष्ट्रपति पद तक पहुंचे हैं। लूला मजदूर वर्ग और गरीब परिवारों के हितों पर जोर देने वाली राजनीति के लिए जाने जाते हैं। उनके समर्थक सामाजिक कल्याण योजनाओं को उनकी राजनीति की बड़ी ताकत मानते हैं, जबकि आलोचक सरकारी खर्च, अर्थव्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़े पुराने विवादों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
भ्रष्टाचार के मामले में जेल भी जा चुके हैं लूला
लूला के राजनीतिक सफर में भ्रष्टाचार का मामला भी बड़ा विवाद रहा है। 2017 में उन्हें भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में दोषी ठहराया गया था। इसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा और 2018 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से भी रोक दिया गया। हालांकि, 2021 में ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि रद्द कर दी। अदालत के फैसले के बाद उनके खिलाफ उस मामले में दोषसिद्धि कायम नहीं रही। इस घटनाक्रम ने ब्राजील की राजनीति में लंबे समय तक बहस को जन्म दिया।
ट्रम्प समर्थक फ्लावियो बोल्सोनारो की हार क्यों अहम ?
फ्लावियो बोल्सोनारो दक्षिणपंथी राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उनके राजनीतिक विचारों की समानता को भी चुनावी चर्चा में जगह मिली। लूला की जीत से ब्राजील में वामपंथी और दक्षिणपंथी राजनीति के बीच मुकाबला फिर चर्चा में आ गया है। चुनावी नतीजे यह भी दिखाते हैं कि पहले दौर में बढ़त हासिल करना अंतिम जीत की गारंटी नहीं होता। दूसरे दौर में मतदाताओं का समर्थन निर्णायक साबित हुआ।
संसद में चुनौतियां, सरकार चलाना आसान नहीं
राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बावजूद लूला के सामने कई राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियां रहेंगी। संसद में दक्षिणपंथी और अन्य विपक्षी दलों की मौजूदगी के कारण सरकारी योजनाओं और बजट को मंजूरी दिलाने के लिए उन्हें दूसरे दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है। सरकारी खर्च, सामाजिक सहायता योजनाओं, रोजगार और आर्थिक सुधारों को लेकर संसद में मतभेद सामने आ सकते हैं। ऐसे में लूला के लिए चुनावी वादों को नीतियों में बदलना एक बड़ी परीक्षा होगी।
भारत के लिए क्यों अहम है लूला की जीत ?
लूला की जीत के बाद भारत और ब्राजील के संबंधों को आगे बढ़ाने पर नजर रहेगी। दोनों देश ब्रिक्स और जी-20 जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करते हैं। व्यापार, ऊर्जा, कृषि, रक्षा, तकनीक व जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर को लूला को जीत की बधाई दी। उन्होंने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करने की इच्छा जताई। भारत के लिए यह जीत इसलिए अहम है, क्योंकि ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावशाली भूमिका निभाता है। हालांकि द्विपक्षीय संबंधों पर वास्तविक असर दोनों सरकारों के आगामी फैसलों और समझौतों पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा ?
लूला का नया कार्यकाल जनवरी 2027 में शुरू होगा। उन्हें एक ओर गरीब परिवारों और मजदूरों से किए गए वादों को पूरा करना होगा, वहीं दूसरी ओर सरकारी खर्च, आर्थिक विकास और संसद में विपक्ष की चुनौती से निपटना होगा। ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लूला दा सिल्वा की जीत ने पहले दौर के नतीजों को पलट दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि वे अपने चौथे कार्यकाल में घरेलू चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और भारत समेत दूसरे देशों के साथ संबंधों को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।




