पटना, 27 अगस्त 2026 : बिहार की राजनीति में राजद संगठन को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। तेजस्वी यादव पार्टी के ब्लॉक से लेकर जिला और पंचायत स्तर तक संगठन में नए चेहरों को जगह देने की तैयारी में हैं। राजद ने सभी प्रकोष्ठों के साथ जिला और पंचायत कमेटियों को भंग कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक कमेटियां भंग होने से पहले राजद के करीब 43 जिला अध्यक्ष थे। इनमें से करीब 20 जिला अध्यक्षों को दोबारा जिम्मेदारी नहीं मिलने की संभावना जताई जा रही है। नई कमेटी में युवा और सक्रिय नेताओं को प्राथमिकता देने की तैयारी है। हालांकि, नए जिला अध्यक्षों के चयन को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। राजद का कहना है कि इसमें क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन, पार्टी के प्रति निष्ठा और संगठन में सक्रियता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
राजद के 43 जिला अध्यक्षों में कौन-कौन से सामाजिक समीकरण थे?
पिछली कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक राजद के करीब 43 जिला अध्यक्षों में 16 यादव और 7 मुस्लिम थे। यानी यादव-मुस्लिम समुदाय से करीब 53% जिला अध्यक्ष आते थे। इसके अलावा 9 गैर-यादव OBC-EBC, 6 SC, 2 सवर्ण, एक वैश्य और एक ST समुदाय से जिला अध्यक्ष थे। नई कमेटी में राजद पारंपरिक सामाजिक आधार को बनाए रखते हुए दूसरे वर्गों को जोड़ सकता है।
नए जिला अध्यक्षों के लिए क्या होंगे मानदंड ?
सूत्रों के मुताबिक नए जिला अध्यक्षों के चयन में मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान दिया जा सकता है :
- उम्र 60 साल से कम हो।
- विवादित छवि वाले नेताओं को प्राथमिकता नहीं मिलेगी।
- युवा और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा।
- क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा जाएगा।
- पार्टी के प्रति निष्ठा और संगठन में सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
राजद के प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन के मुताबिक नए जिला अध्यक्षों के चयन में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक संतुलन, पार्टी के प्रति निष्ठा, पिछले काम और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता जैसे पहलुओं को देखा जाएगा।
करीब 20 पुराने जिला अध्यक्षों की छुट्टी संभव
बिहार में 38 जिले हैं, लेकिन राजद के जिला अध्यक्षों की संख्या करीब 43 रही है। इसकी वजह कुछ जिलों में एक से अधिक संगठनात्मक इकाइयां होना है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक करीब 20 पुराने जिला अध्यक्षों को दोबारा मौका नहीं मिलने की संभावना है। इनमें करीब 15 नेताओं के नाम उम्र के कारण और 5-6 नेताओं के नाम विवाद या पार्टी गतिविधियों से जुड़े कारणों के चलते चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन नामों को लेकर पार्टी की ओर से अंतिम सूची जारी नहीं की गई है।
विवादों में रहे चेहरों पर भी नजर
कुछ जिलों के पुराने अध्यक्षों को लेकर पार्टी के भीतर विवाद या नाराजगी की चर्चा रही है। ऐसे में वहां नए चेहरों को मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
भागलपुर : पुराने जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर से जुड़ा एक वीडियो विवाद में आया था।
वैशाली : बैजनाथ सिंह चंद्रवंशी का कथित आपत्तिजनक ऑडियो सामने आने के बाद विरोध की स्थिति बनी थी।
सीवान : विपिन कुशवाहा विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट को लेकर नाराज हुए थे और इस्तीफे की स्थिति बनी थी।
किशनगंज : विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर अंजार नईमी की नाराजगी सामने आई थी। इन जिलों में पुराने चेहरों की जगह नए नेताओं को मौका मिलने की संभावना पार्टी सूत्रों की ओर से जताई जा रही है।
कई जिलों में पुराने चेहरों की स्थिति मजबूत
सभी पुराने जिला अध्यक्षों को हटाया जाएगा, ऐसा नहीं है। कई जिलों में पुराने नेताओं का संगठन पर पकड़ और पार्टी के भीतर स्वीकार्य होने के कारण उन्हें दोबारा मौका मिलने की संभावना भी बताई जा रही है। आरा/भोजपुर : बीरबल यादव लगातार तीन टर्म से जिला अध्यक्ष रहे हैं। बेगूसराय : मोहित यादव दो बार जिला अध्यक्ष रह चुके हैं और उनके खिलाफ बड़े विवाद की चर्चा नहीं है।नालंदा : अशोक कुमार हिमांशु दो टर्म से अध्यक्ष रहे हैं। सहरसा : मो. ताहिर लंबे समय से जिला अध्यक्ष हैं और पार्टी के पुराने नेताओं में गिने जाते हैं। शेखपुरा : संजय कुमार सिंह को दोबारा मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। बक्सर: शेष नाथ सिंह दो बार जिला अध्यक्ष रह चुके हैं।सीतामढ़ी: सुनील कुशवाहा पार्टी के भरोसेमंद चेहरों में शामिल बताए जाते हैं। मोतिहारी : मनोज यादव पूर्व विधायक रह चुके हैं और उनके नाम को लेकर बड़े विवाद की चर्चा नहीं है।
तेजस्वी क्यों बदल रहे राजद का संगठन ?
राजद में संगठनात्मक बदलाव के पीछे पार्टी नेतृत्व की कई रणनीतियां मानी जा रही हैं।
1. बीजेपी और जन सुराज की चुनौती
राजद के सामने एक ओर भाजपा की चुनौती है तो दूसरी ओर प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली जन सुराज ने बिहार की राजनीति में मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश की है। ऐसे में तेजस्वी यादव संगठन को ज्यादा सक्रिय व आक्रामक बनाकर जमीन पर पार्टी की गतिविधियां बढ़ाना चाहते हैं।
2. युवा नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति
राजद लंबे समय से युवा नेतृत्व की बात करता रहा है। नई जिला कमेटियों में भी युवाओं को ज्यादा जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम होने की बात सामने आ रही है। 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारी से दूर रखने की चर्चा इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
3. संगठन में अनुशासन पर जोर
पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरों को आगे बढ़ाना चाहता है जो संगठन के फैसलों के साथ मजबूती से खड़े रहें। विवादों और सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताने वाले नेताओं की जगह सक्रिय और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को मौका देने की कोशिश हो सकती है।
4. चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद के प्रदर्शन के बाद संगठन की भूमिका और चुनावी तैयारियों की समीक्षा हुई। अब पार्टी की कोशिश उन कमियों को दूर करने की है, जो चुनाव के दौरान सामने आई थीं।
5. हर इलाके के हिसाब से सोशल इंजीनियरिंग
राजद अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम आधार को बनाए रखते हुए A टू Z सोशल इंजीनियरिंग पर भी जोर दे रहा है। ऐसे में अलग-अलग जिलों के सामाजिक समीकरण के हिसाब से जिला अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।
पार्टी ने क्या कहा ?
राजद के प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के समय तकनीकी तौर पर सभी कमेटियां भंग हो जाती हैं। चुनाव और अन्य कार्यक्रमों के चलते पहले की कमेटियों को नई कमेटी बनने तक काम करने की अनुमति दी गई थी। उनके मुताबिक, नए जिला अध्यक्षों के चयन में क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक संतुलन, पार्टी के प्रति निष्ठा, पिछले काम और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता जैसे मानदंडों पर ध्यान दिया जाएगा। राजद के संगठन में होने वाला यह बदलाव सिर्फ जिला अध्यक्ष बदलने तक सीमित नहीं माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश युवा चेहरे, सामाजिक संतुलन और सक्रिय संगठन के जरिए राजद को दोबारा मजबूत करने की है।




