पटना, 24 अगस्त। बिहार में गंगा किनारे कनेक्टिविटी और विकास को नई दिशा देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 23 अगस्त को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित रोजगार मेले के समापन समारोह में 126 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित मरीन ड्राइव कॉरिडोर की योजना की जानकारी दी। इस परियोजना पर करीब 70 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। सरकार के मुताबिक इसमें सरकारी निवेश के साथ निजी क्षेत्र की भी भागीदारी होगी।

कोइलवर से शुरू होगा प्रस्तावित कॉरिडोर

मुख्यमंत्री के अनुसार, नया कॉरिडोर कोइलवर से आगे गंगा किनारे विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य केवल आवागमन को बेहतर बनाना नहीं, बल्कि गंगा किनारे के इलाकों में आधारभूत सुविधाओं, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है।

70 हजार करोड़ के निवेश का मॉडल

प्रस्तावित परियोजना में करीब 20 हजार करोड़ रुपये राज्य सरकार की ओर से लगाए जाने की बात कही गई है, जबकि लगभग 50 हजार करोड़ रुपये निजी क्षेत्र से जुटाने का लक्ष्य है। इस तरह सरकार और निजी निवेश के संयुक्त मॉडल के जरिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना है।

मौजूदा जेपी गंगा पथ करीब 21 किलोमीटर

पटना का मौजूदा जेपी गंगा पथ, जिसे आम तौर पर मरीन ड्राइव कहा जाता है, करीब 21 किलोमीटर लंबा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसे लगभग 6 हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया और वर्ष 2025 में इसका काम पूरा हुआ। अब इसी तरह के मॉडल को गंगा के और बड़े हिस्से तक ले जाने की योजना सामने आई है।

रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

सरकार प्रस्तावित कॉरिडोर को सिर्फ सड़क परियोजना के रूप में नहीं देख रही है। इसके जरिए नए निवेश, व्यापारिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर पैदा करने पर भी जोर है। बड़े स्तर का यह प्रोजेक्ट गंगा किनारे बसे इलाकों में विकास की गति बढ़ाने में मदद कर सकता है।

अभी प्रस्ताव के स्तर पर है योजना

फिलहाल 126 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर और 70 हजार करोड़ रुपये के निवेश को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से घोषणा की जानकारी सामने आई है। इसलिए इसे प्रस्तावित परियोजना के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। परियोजना की विस्तृत रूपरेखा, निर्माण समयसीमा और अन्य तकनीकी जानकारी सामने आने के बाद इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।