गया, 25 अगस्त 2026 : जदयू के वरिष्ठ नेता और संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष संजय झा ने 1996 के भारत-बांग्लादेश गंगा जल समझौते की समीक्षा की जोरदार वकालत की है। गया दौरे पर पहुंचे संजय झा ने कहा कि 30 साल के लिए हुआ यह समझौता 12 दिसंबर को समाप्त हो रहा है और इसका मौजूदा स्वरूप में नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में कोई नया राजनयिक समझौता होता है तो उसमें बिहार के हितों की अनदेखी कतई नहीं होनी चाहिए। संजय झा ने कहा कि 1996 में बिहार की आबादी करीब सवा सात करोड़ थी, जो अब बढ़कर 13 करोड़ से अधिक हो गई है। आबादी बढ़ने के साथ सिंचाई, पेयजल और उद्योगों के लिए पानी की जरूरत भी काफी बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के कारण बिहार के हित प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि बिहार के सामने से गंगा बहती है, फिर भी राज्य पानी का पर्याप्त उपयोग नहीं कर पा रहा है। उत्तर और दक्षिण बिहार में पानी का संकट लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में गंगा जल समझौते की समीक्षा बिहार के लिए बेहद जरूरी है।
फल्गु नदी और रबर डैम का किया निरीक्षण
संसदीय समिति के 18 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ संजय झा गया और बोधगया के दौरे पर हैं। समिति यहां पर्यटन विकास और बजट घोषणाओं की समीक्षा कर रही है। मंगलवार सुबह उन्होंने विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद देवघाट और फल्गु नदी पर बने रबर डैम का निरीक्षण किया। संजय झा ने कहा कि नीतीश सरकार की ओर से बनाए गए रबर डैम के कारण फल्गु नदी में पानी उपलब्ध रहता है। गया में पिंडदान और बोधगया में बौद्ध श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला पूरे साल जारी रहता है। इसलिए फल्गु नदी में सालभर स्वच्छ और पर्याप्त जल प्रवाह बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि फल्गु नदी को सोन नदी से जोड़ने के विकल्प पर भी काम किया जा रहा है। उनका कहना है कि विष्णुपद और बोधगया कॉरिडोर की सफलता के लिए फल्गु नदी में सालभर पानी रहना बेहद महत्वपूर्ण है।
1200 करोड़ के गया-बोधगया कॉरिडोर पर तेजी से काम
संजय झा ने बताया कि केंद्र सरकार के बजट में गया और बोधगया के लिए करीब 1200 करोड़ रुपये के कॉरिडोर प्रोजेक्ट की घोषणा की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की DPR जमा हो चुकी है।उन्होंने कहा कि दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय चौधरी के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में कॉरिडोर की रूपरेखा पर चर्चा हो चुकी है। संजय झा ने कहा कि गया और बोधगया कॉरिडोर का आकर्षण फल्गु नदी से जुड़ा है। इसलिए इसमें सोन नदी का पानी लाने के प्रयास को हर हाल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
पर्यटन के नक्शे पर बदलेगा गया-बोधगया
संजय झा ने दावा किया कि कॉरिडोर और अन्य पर्यटन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद गया-बोधगया का पूरा क्षेत्र बदल जाएगा। उनके मुताबिक, यह क्षेत्र देश के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल होगा और पर्यटन के क्षेत्र में बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि करीब 15 साल पहले बहुत कम लोग मानते थे कि गया-बोधगया पर्यटन के लिए इतना बड़ा केंद्र बन सकता है, लेकिन आज इसकी पहचान देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में दिखाई दे रही है।




