पटना, 17 अक्टूबर 2026 : बिहार सरकार ने शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। इस तरह सरकार ने राज्य में वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन को लेकर एक खबर सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने करीब 10.3 लाख शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान पर जांच पूरी होने तक रोक लगाने का निर्देश दिया है। वित्त विभाग ने शिक्षा विभाग और गृह विभाग को इस संबंध में एक पत्र भी भेजा है। इस रिपोर्ट के अनुसार, वेतन संबंधी आंकड़ों की प्रारंभिक जांच में कई तरह की गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। राज्य सरकार ने अगले महीने का वेतन जारी करने से पहले अनिवार्य जांच कराने और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी तय करने को कहा है।

वित्त विभाग ने शिक्षा और गृह विभाग को भेजा पत्र

बिहार सरकार के वित्त विभाग ने वेतन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच शुरू की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त विभाग के सचिव विनय कुमार ने शिक्षा विभाग और गृह विभाग के अधिकारियों को पत्र भेजकर वेतन भुगतान की प्रक्रिया की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने वेतन तैयार करने, उसकी जांच करने और मंजूरी देने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने को कहा है। इसके साथ ही यदि जांच में धोखाधड़ी या गलती से अतिरिक्त भुगतान की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों से राशि की वसूली करने का निर्देश दिया गया है।

जांच में किस तरह की गड़बड़ियों का आरोप ?

समाचार रिपोर्ट में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से वेतन भुगतान में कई तरह की कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। इनमें शामिल हैं :

  • गैर-सरकारी व्यक्तियों को भुगतान : ऐसे लोगों को वेतन दिए जाने के मामले, जो सरकारी कर्मचारी नहीं थे।
  • पात्रता से अधिक वेतन : कुछ कर्मचारियों को निर्धारित पात्रता से ज्यादा राशि का भुगतान।
  • वेतन कोड में गड़बड़ी : कथित तौर पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन कोड नए कर्मचारियों को आवंटित किए जाने के मामले।
  • मकान किराया भत्ते में अंतर : कुछ कर्मचारियों के HRA में कई गुना वृद्धि किए जाने की जानकारी।

इन मामलों की जांच के बाद ही अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार लोगों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

CAG की टिप्पणियों के आधार पर जांच

रिपोर्ट के मुताबिक, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की टिप्पणियों के आधार पर जांच के आदेश दिए गए हैं। बिहार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के हवाले से बताया गया है कि शिक्षा और गृह विभाग में वेतन संबंधी अनियमितताओं की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। वित्त विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि वेतन संबंधी विवरण तैयार करने, उनकी जांच और मंजूरी का काम नियमित सरकारी कर्मचारियों से कराया जाए। जांच में दोष सिद्ध होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।

क्या सभी शिक्षकों और पुलिसकर्मियों की सैलरी रुकेगी ?

रिपोर्ट में करीब 10.3 लाख शिक्षकों और पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने की बात कही गई है। वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जांच में ऐसे लोगों को वेतन दिए जाने के मामले सामने आए हैं, जो सरकारी कर्मचारी नहीं थे। इसके अलावा कुछ कर्मचारियों को उनकी पात्रता से अधिक वेतन दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि कुछ मामलों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन कोड नए कर्मचारियों को आवंटित किए जाने से उनके खातों में अधिक राशि जमा हुई। वहीं, कुछ कर्मचारियों के मकान किराया भत्ते में भी कई गुना वृद्धि किए जाने की जानकारी मिली है। बिहार में वेतन भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के आदेश की खबर है। हालांकि राज्य सरकार का उद्देश्य गलत भुगतान की पहचान करना, अतिरिक्त राशि की वसूली करना और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करना बताया गया है।