पटना, 28 अक्टूबर 2026। बिहार में बाल देखभाल संस्थानों से बाहर निकलने वाले युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके बेहतर भविष्य के लिए राज्य सरकार, यूनिसेफ और सामाजिक संस्थाओं ने संयुक्त पहल की है। बिहार सरकार के समाज कल्याण निदेशालय, बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क (BCLN), UNICEF और उदयन केयर की साझेदारी से आयोजित कॉन्क्लेव में युवाओं की शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। इस पहल का उद्देश्य संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने वाले युवाओं को सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे वयस्क जीवन की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
संस्थान से निकलने के बाद युवाओं को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
बाल देखभाल संस्थानों से बाहर आने के बाद कई युवाओं को पढ़ाई जारी रखने, रोजगार तलाशने, रहने के लिए सुरक्षित जगह पाने, जरूरी दस्तावेज बनवाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, उन्हें भावनात्मक और सामाजिक सहयोग की भी जरूरत होती है। कॉन्क्लेव में इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं को संस्थान से बाहर निकलने के बाद अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। उनके लिए शिक्षा, रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और अन्य जरूरी सहायता सेवाओं को बेहतर बनाने के साथ विभिन्न सरकारी विभागों और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय बढ़ाना आवश्यक है। यह सम्मेलन वर्ष 2023 में आयोजित पहले राज्यस्तरीय केयर लीवर्स सम्मेलन और उसके बाद बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क को मजबूत करने के प्रयासों की अगली कड़ी है।
समाज कल्याण मंत्री ने युवाओं को दिया आत्मनिर्भर बनने का संदेश
बिहार सरकार की समाज कल्याण मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने वाले युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने और शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियां किसी के सपनों की सीमा तय नहीं कर सकतीं। अपने डॉक्टर बनने के सफर और इस दौरान आई चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने युवाओं से खुद पर संदेह नहीं करने, उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने और अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने भावनात्मक सहयोग और सकारात्मक सोच वाले दोस्तों के महत्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने और सुरक्षित व आत्मनिर्भर भविष्य बनाने में सहयोगी माहौल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
18 साल की उम्र से पहले शुरू होनी चाहिए भविष्य की तैयारी
समाज कल्याण निदेशालय की निदेशक सुश्री इनायत खान ने कहा कि सरकारी संरक्षण में रहने वाले बच्चों को वयस्क जीवन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया 18 वर्ष की उम्र से पहले ही शुरू हो जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और जरूरी सहायता सुनिश्चित करने के साथ उन्हें संस्थान से बाहर निकलने के बाद जीवन की नई शुरुआत के लिए तैयार करना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए कहा कि युवाओं में आत्मविश्वास विकसित करना भी आवश्यक है, ताकि वे अपने फैसले खुद ले सकें और अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकें।
युवाओं को अपने अधिकारों और फैसलों में भागीदारी का मिले अवसर
उदयन केयर की संस्थापक और मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. किरण मोदी ने कहा कि संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने वाले युवाओं को अपने कल्याण के लिए बनाई गई नीतियों और सरकारी प्रावधानों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को अपने जीवन से जुड़े फैसलों में अपनी राय रखने और निर्णय प्रक्रिया में सार्थक भागीदारी का अवसर मिलना चाहिए। वहीं, UNICEF बिहार के बाल संरक्षण विशेषज्ञ बंकू बिहारी सरकार ने कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य दिया। कॉन्क्लेव में बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क के सदस्यों ने अपने अनुभव, उपलब्धियां, चुनौतियां और भविष्य की आकांक्षाएं साझा कीं। चर्चा में युवाओं को उनके अधिकारों के हकदार के रूप में पहचान देने और उनके जीवन को प्रभावित करने वाले फैसलों में उनकी राय शामिल करने की आवश्यकता रेखांकित की गई।
‘प्यार, देखभाल और सहयोग का घोषणापत्र’ पेश
इस कार्यक्रम के दौरान केयर लीवर्स ने ‘प्यार, देखभाल और सहयोग का घोषणापत्र’ प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को सम्मानित भी किया गया। इसके अलावा, अतिथियों ने एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। इसमें संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने वाले युवाओं के अनुभवों, संघर्षों और उपलब्धियों को शामिल किया गया है। इन गतिविधियों के जरिए युवाओं की आवाज को प्रमुखता देने और उनकी उपलब्धियों को समाज के सामने लाने का प्रयास किया गया।
शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
कॉन्क्लेव में कौशल विकास से जुड़ी संस्थाओं और नियोक्ताओं के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई। इसमें युवाओं को शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के तरीकों पर विचार किया गया। इस दौरान बिहार कौशल विकास मिशन, शिक्षा विभाग के करियर पोर्टल और करियर कार्ड, बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (BBOSE), राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS), उद्योग विभाग, जीविका और खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) सहित विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय की संभावनाओं पर चर्चा की गई। होटल उद्योग के प्रतिनिधियों और अन्य शैक्षणिक व कौशल विकास संस्थानों की भूमिका पर भी विचार किया गया। इस पहल का प्रमुख लक्ष्य युवाओं के लिए उपलब्ध योजनाओं और सेवाओं तक पहुंच आसान बनाना है, ताकि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा व रोजगार के विकल्प चुन सकें।
दूसरे राज्यों के केयर लीवर्स नेटवर्क ने साझा किए अनुभव
दिल्ली, मध्य प्रदेश, असम और राजस्थान से आए केयर लीवर्स नेटवर्क के प्रतिनिधियों ने युवाओं के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने, नेटवर्क को मजबूत करने और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाने से जुड़े अनुभव साझा किए। इस दौरान दूसरे राज्यों में अपनाए जा रहे तरीकों से सीखने और बिहार केयर लीवर्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा हुई। कॉन्क्लेव में सामने आए सुझावों के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य बाल देखभाल संस्थानों से बाहर निकलने वाले युवाओं को उनकी जरूरतों के अनुसार समय पर सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकें।




