पटना, 25 अगस्त 2026 : बिहार में स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर टोल टैक्स वसूली की तैयारी तेज हो गई है। सरकार के स्तर पर करीब 50 स्टेट हाईवे और 45 बड़े पुलों का सर्वे पूरा कर लिया गया है। अब सात दिनों के ट्रैफिक डेटा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन सड़कों और पुलों पर व्यावसायिक वाहनों से टोल वसूला जाएगा। हालांकि, निजी वाहन मालिकों के लिए राहत की बात है। मौजूदा योजना के अनुसार निजी कार, बाइक और अन्य निजी वाहनों को टोल से बाहर रखा जाएगा।

50 हाईवे और 45 पुलों का सर्वे क्यों हुआ ?

टोल वसूली की संभावनाओं को देखते हुए संबंधित एजेंसी ने 50 स्टेट हाईवे और राज्य सरकार के अधीन 45 बड़े पुलों का सर्वे किया है। इन मार्गों पर करीब सात दिनों तक वाहनों की आवाजाही को कैमरों के जरिए रिकॉर्ड किया गया। इस डेटा से प्रत्येक सड़क और पुल पर रोजाना गुजरने वाले वाहनों की औसत संख्या का आकलन किया जाएगा। इसके बाद ज्यादा ट्रैफिक वाले मार्गों को टोल वसूली के लिए चुना जा सकता है। इसका मतलब है कि सर्वे में शामिल सभी 95 स्थानों पर टोल लगना तय नहीं है। अंतिम फैसला ट्रैफिक डेटा और सरकार की रिपोर्ट के आधार पर होगा।

निजी गाड़ियों को टोल से राहत

बिहार सरकार की योजना में निजी वाहन मालिकों को फिलहाल राहत दी गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 7 जुलाई 2026 को घोषणा की थी कि राज्य के स्टेट हाईवे और बड़े पुलों पर निजी वाहनों से टोल नहीं लिया जाएगा। इसका मतलब है कि निजी कार, बाइक और अन्य निजी वाहनों को प्रस्तावित टोल व्यवस्था से बाहर रखने की योजना है। प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है।

किस सड़क पर कितना टोल लगेगा ?

व्यावसायिक वाहनों के लिए टोल की दर सड़क की चौड़ाई के आधार पर तय की जाएगी।

  • दो लेन से अधिक और चार लेन से कम चौड़ी सड़क: निर्धारित दर का 60%
  • चार लेन या उससे अधिक चौड़ी सड़क: निर्धारित दर का 100%
  • 5.5 मीटर चौड़ी मध्यवर्ती लेन वाली सड़क: निर्धारित दर का 50%

इस व्यवस्था के तहत सड़क की चौड़ाई के साथ-साथ वाहन की श्रेणी और तय की गई दूरी के आधार पर शुल्क निर्धारित होगा।

पुलों पर कैसे तय होगा टोल ?

पुलों के मामले में उसकी लंबाई का टोल निर्धारण में विशेष प्रभाव माना जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक पुल की लंबाई को 10 गुना प्रभाव के साथ जोड़ा जाएगा। उदाहरण के तौर पर अगर किसी मार्ग में 45 किलोमीटर सड़क और 5 किलोमीटर लंबा पुल है, तो टोल निर्धारण के लिए प्रभावी लंबाई 95 किलोमीटर मानी जाएगी। हालांकि, अंतिम दर और किन पुलों पर टोल लगेगा, यह सरकार की रिपोर्ट और अंतिम मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।

किस वाहन से कितना टोल लिया जा सकता है ?

प्रस्तावित दरों के अनुसार व्यावसायिक वाहनों के लिए प्रति किलोमीटर शुल्क इस तरह बताया गया है:

वाहन की श्रेणी ——————————- प्रस्तावित टोल दर

छोटे व्यावसायिक वाहन/मालवाहक—-- ₹2 प्रति किमी

बस या 2-धुरी वाले ट्रक —— ₹4.25 प्रति किमी

3-धुरी वाले व्यावसायिक वाहन———— ₹4.60 प्रति किमी

6-धुरी भारी निर्माण मशीनरी/अर्थ मूविंग इक्विपमेंट—₹6.65 प्रति किमी

सात या अधिक धुरी वाले बड़े वाहन———-₹8.10 प्रति किमी

सरकार को कितना राजस्व मिलेगा ?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी सड़कों और पुलों पर अंतिम रूप से टोल लगाया जाएगा। इसलिए सरकार को होने वाले संभावित राजस्व का आंकड़ा भी अभी तय नहीं है। सर्वे के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट में ट्रैफिक की स्थिति, संभावित टोल वाले मार्ग और राजस्व का अनुमान सामने आ सकता है।

अब आगे क्या होगा ?

अब सर्वे से जुटाए गए Traffic Data का विश्लेषण किया जाएगा। इसके आधार पर ज्यादा ट्रैफिक वाले स्टेट हाईवे और पुलों का चयन हो सकता है। इसके बाद टोल की दरों और वसूली की व्यवस्था को अंतिम रूप देकर प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजे जाने की संभावना है। यानी फिलहाल बिहार के सभी 50 हाईवे और 45 पुलों पर टोल लगना तय नहीं है। अंतिम फैसला सरकार की रिपोर्ट और कैबिनेट की मंजूरी के बाद होगा।