पटना, 27 अगस्त 2026 : बिहार के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश में खाद खरीदने की प्रक्रिया जल्द आसान होने वाली है। अब किसानों को उर्वरक के लिए दुकानों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। नई Digital Fertilizer Booking System के तहत किसान मोबाइल ऐप से खाद की बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग के बाद उन्हें QR Code मिलेगा, जिसे अधिकृत दुकानदार को दिखाकर तय मात्रा में खाद ली जा सकेगी। केंद्र सरकार के Fertilizer Sales Application System (FSAS) के तहत तैयार हो रही इस व्यवस्था को बिहार में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। इसका मकसद खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ कालाबाजारी और जमाखोरी पर लगाम लगाना है।
कैसे काम करेगा खाद बुकिंग का नया सिस्टम ?
नई व्यवस्था में किसान की पहचान के साथ उसकी जमीन, फसल और खेती के रकबे की जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके आधार पर किसान को फसल के लिए जरूरी उर्वरक की अनुमानित मात्रा बताई जाएगी। किसान मोबाइल ऐप पर पूरे फसल सीजन के लिए प्रस्तावित खाद की मात्रा देख सकेगा। जरूरत के मुताबिक मात्रा चुनकर ऑनलाइन बुकिंग की जा सकेगी। बुकिंग पूरी होने के बाद किसान के मोबाइल पर QR Code जारी होगा। यह कोड सीमित समय के लिए मान्य रहेगा। किसान तय समय में अधिकृत खाद विक्रेता के पास पहुंचकर QR कोड दिखाएगा और बुक की गई खाद प्राप्त कर सकेगा।
फसल और जमीन के रकबे के हिसाब से मिलेगी खाद
इस सिस्टम में सिर्फ किसान की पहचान ही नहीं, बल्कि फसल व खेती का रकबा भी दर्ज होगा। उर्वरक की प्रस्तावित मात्रा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR की सामान्य कृषि अनुशंसाओं के आधार पर तय करने में मदद मिलेगी। इससे ज्यादा खाद उठाने पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
कालाबाजारी पर कैसे लगेगी लगाम ?
बिहार में बुआई के समय खाद की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी दौरान खाद की कमी, जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आती हैं। डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद सरकार के पास यह डेटा रहेगा कि किस इलाके में कितनी खाद की मांग है और कितनी खाद वितरित हुई। QR कोड आधारित वितरण से यह भी ट्रैक किया जा सकेगा कि किस किसान को कितनी मात्रा में उर्वरक दिया गया। इससे फर्जी खरीद और अनियमित वितरण पर निगरानी मजबूत हो सकती है।
बटाईदार किसानों को भी मिलेगा फायदा
नई व्यवस्था में सिर्फ जमीन के मालिक किसानों तक सीमित रहने के बजाय बटाईदार किसानों को भी शामिल करने का प्रावधान बताया गया है। पूर्वजों के नाम दर्ज जमीन पर खेती करने वाले किसान और सामुदायिक, मंदिर, सरकारी या संस्थागत जमीन पर खेती करने वाले किसानों को भी व्यवस्था में शामिल किया जा सकेगा। अगर ऐसे किसानों को अपनी खेती या फसल की जानकारी दर्ज कराने में परेशानी होती है तो कृषि विभाग की ओर से सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
पंचायत से जिला स्तर तक मिलेगी मदद
डिजिटल सिस्टम में किसानों की समस्या के समाधान के लिए सहायता तंत्र भी तैयार किया जाएगा।
- पंचायत स्तर: कृषि समन्वयक और किसान सलाहकार
- प्रखंड स्तर: समस्या के समाधान की व्यवस्था
- अनुमंडल और जिला स्तर : शिकायतों की निगरानी
- जरूरत पड़ने पर हेल्प डेस्क/कंट्रोल रूम भी बनाया जा सकता है।
किसानों को क्या होगा सीधा फायदा ?
नई व्यवस्था लागू होने पर किसानों को कई स्तर पर फायदा मिलने की उम्मीद है। पहला, किसान को पहले से पता रहेगा कि उसके लिए कितनी खाद निर्धारित है। दूसरा, मोबाइल से घर बैठे खाद की बुकिंग की सुविधा मिलेगी। तीसरा, QR कोड के जरिए अधिकृत विक्रेता से खाद लेने की व्यवस्था होगी। चौथा, खाद की सप्लाई और वितरण पर सरकार की निगरानी मजबूत होगी। पांचवां, कालाबाजारी, जमाखोरी और फर्जी खरीद पर नियंत्रण लगाने में मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर, अगर यह Digital Fertilizer Distribution System प्रभावी तरीके से लागू होता है तो बिहार में खाद खरीद और वितरण की मौजूदा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।




