गया, 26 अगस्त 2026 : बिहार के गया जिले में भैंस के मालिकाना हक को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें अब DNA टेस्ट से यह तय करने की तैयारी है कि भैंस का असली मालिक कौन है। दोनों पक्ष भैंस पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने DNA जांच कराने का निर्देश दे दिया है। पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस तरह बिहार में पहली बार एक जानवर के मालिकाना हक के लिए डीएनए टेस्ट कराया जा रहा है।

दो पक्षों का दावा, कौन है असली मालिक ?

यह पूरा मामला अतरी थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, मोहड़ा के सेउतर निवासी सूरज यादव की भैंस कुछ दिन पहले लापता हो गई थी। काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला। बाद में भैंस उपथू के महाचक गांव के नौरंगा टोली में दिखाई दी, जहां प्रकाश मांझी के पक्ष ने उसे अपने पास रखा था।

सूरज यादव ने दर्ज कराया चोरी का मामला

भैंस के नौरंगा में होने की जानकारी मिलने के बाद सूरज यादव वहां पहुंचे और भैंस को अपनी बताते हुए पुलिस में चोरी की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अतरी थाना पुलिस ने भैंस को थाने बुलाया। शुरुआती कार्रवाई के बाद उसे सूरज यादव को सौंप दिया गया। हालांकि, इसके बाद मामला और उलझ गया और पुलिस पर एक पक्ष की तरफदारी का आरोप लगा।

थाना प्रभारी पर भी उठे सवाल

इस मामले में अतरी थाना प्रभारी पर एक पक्ष की मदद करने के आरोप लगाए गए। आरोपों के बाद भैंस को दोबारा थाने बुलाया गया और कुछ समय तक उसे थाने में रखा गया। फिलहाल भैंस फिर से सूरज यादव को सौंपे जाने की बात सामने आई है।

प्रकाश मांझी के पक्ष का दावा- चार साल पहले चोरी हुई थी भैंस

दूसरी ओर, प्रकाश मांझी के पक्ष का दावा है कि जिस भैंस पर सूरज यादव अपना अधिकार जता रहे हैं, वह उनकी भैंस है, जो करीब चार साल पहले चोरी हो गई थी। उनका कहना है कि भैंस को उनका घर पहले से पता था और इसी वजह से वह दोबारा नौरंगा लौट आई। दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग होने के कारण पुलिस के सामने असली मालिक की पहचान करना चुनौती बन गया है।

IG विकास वैभव ने दिए DNA जांच के निर्देश

इस बीच मामले को सुलझाने के लिए IG विकास वैभव ने ग्रामीण SP दिव्यांजलि जायसवाल को निष्पक्ष जांच और कार्रवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है। दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के साथ अब भैंस का DNA टेस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

DNA रिपोर्ट बताएगी असली मालिक कौन ?

भैंस के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद में अब DNA रिपोर्ट सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि दोनों पक्षों में से किसका दावा सही है। IG विकास वैभव के मुताबिक, यह पुराना विवाद है और दोनों पक्ष भैंस पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं। इसलिए निष्पक्ष जांच के साथ वैज्ञानिक तरीके से मामले का समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। अब सभी की नजर DNA जांच की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी और भैंस के वास्तविक मालिकाना हक को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।