नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली अब सिर्फ राजनीतिक और प्रशासनिक केंद्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक आधारित सुशासन (Technology Driven Governance) की नई पहचान भी बनाएगी। दिल्ली सरकार ने शासन व्यवस्था में तकनीक और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 'दिल्ली नेक्स्ट – कोड, क्रिएट एंड चेंज' (Delhi Next – Code, Create & Change) नामक सिविक-टेक इनोवेशन प्रोग्राम की शुरुआत की है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक हैकाथॉन या तकनीकी प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ऐसा मंच है, जहां युवाओं के नवाचार (Innovation) को सीधे दिल्ली सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली से जोड़ा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि प्रतिभाशाली युवाओं के तकनीकी समाधानों का उपयोग वास्तविक समस्याओं के समाधान में किया जाए।
पारंपरिक हैकाथॉन से अलग होगी यह पहल
आमतौर पर हैकाथॉन में प्रतिभागी अपने तकनीकी मॉडल प्रस्तुत करते हैं, विजेताओं को पुरस्कार मिलता है और कार्यक्रम वहीं समाप्त हो जाता है। लेकिन 'दिल्ली नेक्स्ट' की अवधारणा इससे बिल्कुल अलग है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस कार्यक्रम में चुनी जाने वाली शीर्ष 60 टीमों के आइडियाज केवल प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहेंगे। उनके तैयार किए गए मॉडल और वर्किंग प्रोटोटाइप को संबंधित सरकारी विभागों के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। यदि ये समाधान प्रभावी साबित होते हैं, तो उन्हें चरणबद्ध तरीके से दिल्ली सरकार की नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युवाओं के तकनीकी विचार केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का माध्यम बनें।
युवाओं को शासन व्यवस्था का साझेदार बनाने की पहल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय में केवल पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था से सुशासन संभव नहीं है। आधुनिक शासन के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी तीनों का साथ आवश्यक है।
उन्होंने कहा,
"आज शासन व्यवस्था केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रह सकती। सुशासन के लिए तकनीक, इनोवेशन और जनभागीदारी का समन्वय जरूरी है। हमारे युवा केवल देश का भविष्य नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण वर्तमान शक्ति हैं।"
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार युवाओं को केवल प्रतियोगी के रूप में नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था के सक्रिय भागीदार के रूप में देख रही है।
दिल्ली की प्रमुख समस्याओं का तकनीकी समाधान खोजने की कोशिश
इस कार्यक्रम के तहत उन चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनका सामना दिल्ली के नागरिक रोजाना करते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- शहरी बुनियादी ढांचे (Urban Infrastructure) में सुधार
- जलभराव की समस्या का समाधान
- ट्रैफिक प्रबंधन को स्मार्ट बनाना
- स्मार्ट पार्किंग सिस्टम विकसित करना
- वायु प्रदूषण की निगरानी और नियंत्रण
- ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management)
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इकोसिस्टम को मजबूत करना
- सरकारी और नागरिक सेवाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण
- डेटा आधारित निर्णय प्रणाली विकसित करना
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रशासनिक समाधान
सरकार का मानना है कि तकनीक आधारित समाधान इन समस्याओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से दूर कर सकते हैं।
विजेता टीमों को मिलेगा मेंटरशिप और सरकारी सहयोग
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि चयनित टीमों को केवल पुरस्कार राशि देकर विदा नहीं किया जाएगा।
प्रत्येक विजेता टीम को संबंधित सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ जोड़ा जाएगा, जो उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन (Mentorship) देंगे। इससे प्रतिभागियों को सरकारी कार्यप्रणाली को समझने, अपने मॉडल को बेहतर बनाने और उसे बड़े स्तर पर लागू करने का अवसर मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य एक ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें सरकार, स्टार्टअप्स, उद्योग, शोध संस्थान और शैक्षणिक संस्थान मिलकर नई तकनीकों के माध्यम से बेहतर शासन व्यवस्था विकसित करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की सरकारें केवल प्रशासन चलाने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल टेक्नोलॉजी के माध्यम से अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी शासन प्रदान करेंगी।
तीन चरणों में पूरा हुआ कार्यक्रम
पहला चरण – जागरूकता अभियान
कार्यक्रम के पहले चरण में देशभर के युवाओं तक पहुंचने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अभियान के माध्यम से एक करोड़ से अधिक युवाओं तक इस पहल की जानकारी पहुंचाई गई।
दूसरा चरण – पंजीकरण और आइडिया सबमिशन
दूसरे चरण में 2.5 लाख से अधिक युवाओं ने इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराया। इनमें से प्रतिभागियों ने 5,000 से अधिक तकनीकी प्रस्ताव (Technical Proposals) सरकार को भेजे।
तीसरा और अंतिम चरण – शीर्ष 60 टीमों का चयन
विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय समिति ने सभी प्रस्तावों का तकनीकी और व्यावहारिक मूल्यांकन किया। इसके बाद शीर्ष 60 टीमों का चयन किया गया। इन टीमों ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के समक्ष अपने वर्किंग प्रोटोटाइप प्रस्तुत किए।
अब इन टीमों के मॉडलों का विभिन्न सरकारी विभागों के सहयोग से पायलट स्तर पर परीक्षण किया जाएगा। सफल रहने पर इन्हें दिल्ली सरकार की विभिन्न सेवाओं और योजनाओं में लागू किया जाएगा।
दिल्ली सरकार का विजन
दिल्ली सरकार का मानना है कि यदि युवाओं की तकनीकी क्षमता और सरकारी संसाधनों को एक साथ जोड़ा जाए, तो राजधानी की अनेक पुरानी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। इसी सोच के साथ 'दिल्ली नेक्स्ट – कोड, क्रिएट एंड चेंज' कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य दिल्ली को देश की पहली 'सिविक-टेक कैपिटल' के रूप में स्थापित करना और तकनीक आधारित सुशासन का राष्ट्रीय मॉडल तैयार करना है।




