नवादा परीक्षा केंद्र से शुरू हुआ बड़ा खुलासा
बिहार सिपाही बहाली परीक्षा में कथित धांधली का मामला अब आर्थिक अपराध इकाई (Economic Offences Unit-EOU) तक पहुंच गया है। राज्य सरकार के निर्देश पर नवादा सदर थाना में दर्ज प्राथमिकी (First Information Report-FIR) संख्या 610/26 की जांच EOU ने अपने हाथ में ले ली है। मामला 14 जून 2026 को आयोजित मद्य निषेध सिपाही, जेल गार्ड और चलंत दस्ता सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। शुरुआती जांच में परीक्षा केंद्र के भीतर संगठित तरीके से नकल कराने की साजिश के संकेत मिले हैं।
15 लोगों को बनाया गया आरोपी
EOU की जांच के दायरे में अब तक कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें सात परीक्षार्थी, बायोमेट्रिक और जैमर सिस्टम लगाने वाली एजेंसी के कई कर्मचारी तथा परीक्षा ड्यूटी पर तैनात दो इन्विजिलेटर शामिल हैं। एजेंसी के जिन कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उनमें विपिन कुमार, विकास कुमार, कुणाल कुमार, रोहित कुमार, रौशन कुमार और मनीष कुमार प्रमुख हैं। इन पर परीक्षा की निष्पक्षता से समझौता करने और अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने में भूमिका निभाने का आरोप है।
केंद्राधीक्षक की शिकायत से शुरू हुई कार्रवाई
पूरा मामला नवादा के कन्हाई लाल साहू महाविद्यालय परीक्षा केंद्र से सामने आया। केंद्राधीक्षक वाल्मीकि प्रसाद की लिखित शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि परीक्षा केंद्र पर तैनात कुछ तकनीकी कर्मचारियों ने बायोमेट्रिक और जैमर व्यवस्था का दुरुपयोग कर अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने की साजिश रची।
14 जून को ही हिरासत में आया जैमर ऑपरेटर, बाथरूम की छत से मिला मोबाइल
14 जून 2026 को परीक्षा के दौरान संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बाद पुलिस और जांच टीम ने जैमर ऑपरेटर विपिन कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसकी निशानदेही पर परीक्षा केंद्र के पीछे बने बाथरूम की छत से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। जांच में मिले मोबाइल से सात अभ्यर्थियों के नाम, उनके रोल नंबर के अंतिम तीन अंक तथा प्रश्नपत्र के विभिन्न सेट की तस्वीरें मिलने का दावा किया गया है।
आंसर-की तैयार कर अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े रोहित कुमार उर्फ मुरारी के निर्देश पर 10 से 100 तक सीरियल नंबर वाली एक कथित उत्तर-सूची (Answer Key) तैयार की गई थी। आरोप है कि इसी उत्तर-सूची को जैमर ऑपरेटर के माध्यम से चयनित परीक्षार्थियों तक पहुंचाया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने के लिए मोटी रकम का लेन-देन हुआ था।
EOU अब तलाश रही है पूरे गिरोह की कड़ी
आर्थिक अपराध इकाई अब केवल परीक्षा केंद्र तक सीमित जांच नहीं कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित फर्जीवाड़े के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय था या नहीं। जांच में मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (Call Detail Record-CDR), डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। यदि जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है।
भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर सरकारी भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाह EOU की विस्तृत जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा में धांधली का दायरा कितना बड़ा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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सिपाही भर्ती परीक्षा में कैसे टूटा सुरक्षा का घेरा? 15 पर FIR, अब EOU ने संभाली पूरे नेटवर्क की जांच
बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में नवादा के परीक्षा केंद्र पर सामने आए कथित फर्जीवाड़े की जांच अब EOU के हाथ में है। 15 लोगों पर FIR दर्ज की गई है। जांच में बायोमेट्रिक और जैमर ऑपरेटरों की कथित मिलीभगत, मोबाइल से आंसर-की पहुंचाने और संगठित नेटवर्क की आशंका की पड़ताल की जा रही है।




