5 जुलाई 2026

कोडरमा/सतगावां: बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के बीच अवैध शराब तस्करी पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत बिहार पुलिस के उत्पाद विभाग को बड़ी सफलता मिली है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में झारखंड के कोडरमा जिले के सतगावां क्षेत्र से गुजर रही एक पिकअप वैन से 315 लीटर अवैध विदेशी शराब बरामद की गई। शराब को वाहन में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त तहखाने (हिडन चैम्बर) में छिपाकर बिहार ले जाया जा रहा था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने वाहन चालक को गिरफ्तार कर लिया, जबकि शराब से लदी पिकअप वैन को भी जब्त कर लिया गया। मामले में बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

गुप्त सूचना पर बिछाया गया जाल

उत्पाद विभाग के अधिकारियों के अनुसार उन्हें सूचना मिली थी कि झारखंड के सतगावां क्षेत्र से एक पिकअप वाहन के जरिए भारी मात्रा में विदेशी शराब बिहार भेजी जा रही है। सूचना के आधार पर बिहार उत्पाद विभाग की टीम ने गोविंदपुर उत्पाद चौकी के पास विशेष वाहन जांच अभियान शुरू किया।

कुछ ही देर बाद संदिग्ध पिकअप वैन (BR01GD-7945) वहां पहुंची। पुलिस ने वाहन को रोककर उसकी गहन तलाशी ली। प्रारंभिक जांच में कुछ नहीं मिला, लेकिन जब वाहन की बारीकी से जांच की गई तो उसमें बने विशेष हिडन चैम्बर का पता चला।

गुप्त तहखाने से निकली 1,750 शराब की बोतलें

तलाशी के दौरान पिकअप के गुप्त तहखाने से 35 कार्टन विदेशी शराब बरामद की गई। इन कार्टनों में 180 मिलीलीटर की कुल 1,750 बोतलें थीं, जिनकी कुल मात्रा 315 लीटर बताई गई है।

उत्पाद विभाग के अनुसार शराब की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि यह खेप झारखंड से बिहार के बेगूसराय भेजी जा रही थी।

चालक गिरफ्तार, केस दर्ज

मौके से गिरफ्तार चालक की पहचान झारखंड के कोडरमा जिले के सतगावां निवासी प्रमोद ताती के 23 वर्षीय पुत्र बीरबल के रूप में हुई है।

उत्पाद विभाग ने आरोपी के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

बड़े शराब तस्करी नेटवर्क के मिले संकेत

उत्पाद विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि झारखंड के सतगावां मार्ग के जरिए बिहार में शराब तस्करी का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है।

तस्कर पुलिस से बचने के लिए पिकअप, ट्रक और अन्य मालवाहक वाहनों में विशेष गुप्त तहखाने तैयार कराते हैं, जिनमें शराब छिपाकर बिहार पहुंचाई जाती है।

अलग-अलग सामान की आड़ में होती है तस्करी

जांच में यह भी सामने आया है कि शराब तस्कर अक्सर चावल, सब्जियां, मछली, केला, कबाड़ और अन्य सामान से लदे वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। इन वाहनों में नीचे या किनारों पर गुप्त चैम्बर बनाकर शराब छिपा दी जाती है, ताकि सामान्य जांच के दौरान इसका पता न चल सके।

उत्पाद विभाग का मानना है कि इस तरीके से लंबे समय से शराब की तस्करी की जा रही है।

अभियान रहेगा जारी

उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिहार में शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ऐसे विशेष अभियान लगातार जारी रहेंगे।

विभाग का कहना है कि केवल तस्करों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पूरे शराब तस्करी सिंडिकेट की पहचान कर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।

अधिकारियों ने कहा कि सीमा क्षेत्रों में वाहन जांच और खुफिया निगरानी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि बिहार में अवैध शराब की तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।