अयोध्या | 5 जुलाई 2026

उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से नकदी चोरी के मामले में जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे है। अब तक की जांच में सामने आया है कि दानपात्रों की नकदी की गणना करने वाले कर्मचारी केवल चोरी तक सीमित नहीं थे, बल्कि कथित तौर पर संगठित गिरोह बनाकर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को जमीन, मकान, वाहन, आभूषण और अन्य संपत्तियों में निवेश कर रहे थे। पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई में आरोपितों के पास से भारी मात्रा में नकदी, विदेशी मुद्रा, जेवर और संपत्तियों के दस्तावेज बरामद हुए हैं।

संगठित तरीके से हो रही थी चोरी

जांच एजेंसियों के अनुसार, दानपात्रों की नकदी की गणना करने वाले कर्मचारियों ने एक संगठित नेटवर्क तैयार कर रखा था। गिरोह में ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया था जो किसी विवाद या जांच की स्थिति में उनकी मदद कर सकें। चोरी से प्राप्त रकम का आपस में बंटवारा किया जाता था और फिर उसे अलग-अलग माध्यमों से निवेश किया जाता था, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके।

79 लाख रुपये से अधिक नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद

25 जून को दर्ज एफआईआर के बाद गिरफ्तार किए गए आठों आरोपितों से पुलिस ने अब तक 79 लाख 85 हजार 493 रुपये नकद, 1121 अमेरिकी डॉलर और बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह बरामदगी शुरुआती चरण की है और संपत्तियों का वास्तविक मूल्य इससे कहीं अधिक हो सकता है।

अविनाश के पास मिली सबसे अधिक नकदी

जांच में सबसे बड़ी बरामदगी आरोपी अविनाश के पास से हुई। उसके कब्जे से 20 लाख 39 हजार 220 रुपये नकद और 1121 अमेरिकी डॉलर मिले। बाद में पुलिस रिमांड के दौरान उसके ठिकानों की तलाशी में एक मारुति ब्रेजा कार, महंगे आभूषण और शहर में स्थित एक कीमती प्लॉट के दस्तावेज भी बरामद किए गए।

लवकुश मिश्र के नाम मिली जमीन और आलीशान मकान

आरोपी लवकुश मिश्र के पास से 14 लाख 25 हजार रुपये नकद बरामद हुए। जांच में पता चला कि उसकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर महंगी जमीन खरीदी गई थी। इसके अलावा एक वर्ष के भीतर उनके बैंक खाते से लगभग 24 लाख रुपये का लेनदेन हुआ। पुलिस को लवकुश का निर्माणाधीन आलीशान मकान भी मिला है, जिसकी जांच की जा रही है।

अनुकल्प मिश्र ने खरीदा नोएडा में फ्लैट

आरोपी अनुकल्प मिश्र के पास से 16 लाख 82 हजार 40 रुपये नकद मिले। जांच में सामने आया कि उसने अयोध्या के कौशलपुरी इलाके में लगभग 65 लाख रुपये कीमत का मकान खरीदा था। इसके अलावा नोएडा में एक फ्लैट और लखनऊ में बीबीडी कॉलेज के पास रिश्तेदार के नाम पर जमीन भी खरीदी गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि वह अपने रिश्तेदारों और परिजनों की आर्थिक मदद भी कर रहा था।

अन्य आरोपितों के खिलाफ भी मिले निवेश के प्रमाण

जांच एजेंसियों को आरोपी करुणेश पांडेय के नाम पर भी कई संपत्तियों की जानकारी मिली है। वहीं रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू द्वारा जमीन, मकान, शेयर बाजार और अन्य क्षेत्रों में निवेश किए जाने के साक्ष्य मिले हैं। हालांकि उसके पास से नकदी अपेक्षाकृत कम, करीब एक लाख रुपये ही बरामद हुई।

कुछ महीने पहले ही गणनाकर्मी बने मनीष यादव के पास बड़ी नकदी नहीं मिली, लेकिन जांच में यह जानकारी सामने आई कि उसने हाल के दिनों में धार्मिक आयोजनों पर बड़ी राशि खर्च की थी।

पूर्व इंचार्ज के घर निर्माण में लगा धन

जांच में यह भी सामने आया कि दानपात्र गणना के पूर्व इंचार्ज सुभाषचंद्र श्रीवास्तव ने कथित तौर पर चोरी की रकम का इस्तेमाल अपने घर के निर्माण में किया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बैंक से सेवानिवृत्त और विवादों में रहने के बावजूद उन्हें दोबारा गणना कार्य का प्रभारी कैसे बनाया गया।

छोटे नोट और सिक्के तक नहीं छोड़े

पुलिस की बरामदगी सूची से यह भी स्पष्ट हुआ कि आरोपित केवल बड़े नोट ही नहीं, बल्कि 10, 20, 50 और 100 रुपये के नोटों के साथ-साथ एक-एक रुपये के सिक्के तक अपने पास रखते थे। इसके अलावा सोने-चांदी के आभूषण, अंगूठियां, चांदी जैसे धातु के सामान और विदेशी मुद्रा भी जब्त की गई है।

SIT की जांच जारी

राज्य सरकार के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। जांच एजेंसियां अब आरोपितों की चल और अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, रिश्तेदारों के खातों में हुए लेनदेन और संभावित अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से जुड़ा यह मामला प्रदेश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराधों में शामिल हो गया है, जिसकी जांच अभी जारी है।