मुजफ्फरपुर | 17 जुलाई 2026

नोएडा के सेक्टर-66 स्थित मामूरा गांव में ई-बाइक बैटरी ब्लास्ट हादसे में जान गंवाने वाली मुजफ्फरपुर की रहने वाली स्नेहा श्रीवास्तव का पार्थिव शरीर गुरुवार शाम उनके पैतृक आवास पहुंचा। जैसे ही एंबुलेंस घर के बाहर रुकी, पूरा मोहल्ला गम में डूब गया। जिस घर में कुछ महीनों बाद शादी की तैयारियां होनी थीं, उसी आंगन से स्नेहा की अंतिम यात्रा निकली। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और आसपास मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

दिसंबर में होनी थी सगाई, सजने वाले थे शादी के सपने

परिजनों के अनुसार, स्नेहा की शादी बेंगलुरु की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर से तय हुई थी। दिसंबर 2026 में सगाई होनी थी और परिवार ने शादी की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं। पिता अश्विनी श्रीवास्तव और भाई अपूर्व बेटी के भविष्य को लेकर कई सपने संजोए हुए थे, लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया।

मां के निधन के बाद संभाली थी परिवार की जिम्मेदारी

चार बहनों में दूसरे स्थान पर रहने वाली स्नेहा ने वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान मां के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मुरादाबाद से बीबीए की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद नोएडा की एक निजी कंपनी में नौकरी शुरू की। परिवार का कहना है कि उनका सपना कॉर्पोरेट अनुभव हासिल कर आगे चलकर अपना खुद का बड़ा व्यवसाय शुरू करने का था।

बीमारी छिपाकर पिता को भेजा था आखिरी संदेश

हादसे वाले दिन स्नेहा की तबीयत ठीक नहीं थी और वह कमरे से बाहर निकलने की स्थिति में भी नहीं थीं। बावजूद इसके उन्होंने अपने पिता को चिंता से बचाने के लिए संदेश भेजा कि वह ठीक हैं और ऑफिस के लिए निकल चुकी हैं। बाद में यही संदेश परिवार के लिए सबसे भावुक याद बन गया। परिजनों का कहना है कि अगर वह उस दिन रोज की तरह ऑफिस चली गई होतीं, तो शायद यह हादसा नहीं होता।

नया कमरा लेने का सपना भी रह गया अधूरा

नोएडा में नौकरी शुरू किए स्नेहा को करीब ढाई महीने ही हुए थे। वह फिलहाल एक छोटे पीजी में रह रही थीं और जल्द ही बड़ा कमरा किराये पर लेने की तैयारी कर रही थीं। उन्होंने पिता से कहा था कि नया कमरा लेने के बाद वह उन्हें नोएडा बुलाएंगी। लेकिन उससे पहले ही हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली। पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर एयर एंबुलेंस से पटना लाया गया, जहां से सड़क मार्ग से मुजफ्फरपुर पहुंचाया गया। अंतिम दर्शन के बाद सिकंदरपुर मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।