सारण शिक्षा विभाग में करोड़ों के लेन-देन का खुलासा
पटना/सारण: बिहार के सारण जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। माध्यमिक शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) अजीत कुमार हरिजन पर लगे रिश्वत के आरोपों की जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ है। पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अधिकारी की घोषित आय और वास्तविक वित्तीय गतिविधियों में बड़ा अंतर मिला है। रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी गई है, जिसके बाद पूरे मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
27 लाख वेतन, लेकिन खातों में 2.51 करोड़ का लेन-देन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2023 से अप्रैल 2026 के बीच लगभग 32 महीनों में डीपीओ को वेतन के रूप में करीब 27.43 लाख रुपये मिले। वहीं इसी अवधि में डीपीओ और उनकी पत्नी के बैंक खातों में 2 करोड़ 51 लाख 6 हजार 562 रुपये का लेन-देन दर्ज हुआ। जांच समिति ने इसे आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक बताते हुए गंभीर वित्तीय जांच की आवश्यकता जताई है।
पत्नी के नाम खरीदी गई जमीन, मकान निर्माण भी जांच के दायरे में
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि डीपीओ ने अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर लगभग 41.50 लाख रुपये मूल्य की 6 बीघा 9 कट्ठा 8 धूर जमीन खरीदी। इसके अलावा करोड़ों रुपये की लागत से मकान निर्माण की जानकारी भी जांच टीम को मिली है। समिति ने इन संपत्तियों के स्रोत की विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की है।
रिश्वत के पैसे परिजनों के खातों तक पहुंचने का दावा
रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित रिश्वत की रकम केवल अधिकारी के खाते तक सीमित नहीं रही। जांच में दावा किया गया कि राशि उनकी पत्नी, भाई, साले, भतीजी और तत्कालीन चालक के बैंक खातों में भी डिजिटल माध्यम से भेजी गई। समिति ने आशंका जताई है कि विभिन्न खातों के जरिए रकम को समायोजित करने की कोशिश की गई।
12.50 लाख रिश्वत मांगने के आरोप से शुरू हुई थी जांच
पूरा मामला संवेदक रवि कुमार राम की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विभागीय कार्य कराने के बदले 12.50 लाख रुपये की मांग की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार 10.70 लाख रुपये नकद और करीब 1.03 लाख रुपये ऑनलाइन अलग-अलग खातों में भेजे गए। बाद में केवल 1.53 लाख रुपये लौटाए गए, जबकि शेष राशि वापस नहीं की गई।
आचार नियमों के उल्लंघन की भी पुष्टि
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी बिना अनुमति अपने या परिवार के माध्यम से आर्थिक लाभ स्वीकार नहीं कर सकता। ऐसे में परिजनों के खातों में रकम पहुंचना प्रथम दृष्टया सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला माना गया है।
आगे क्या होगा?
उप विकास आयुक्त (डीडीसी) की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने डीपीओ, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों, संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कराने की अनुशंसा की है। अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई और संबंधित एजेंसियों की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो यह मामला आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में शामिल हो सकता है।




