बर्धमान | 13 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल में बालू और मिट्टी से जुड़े कथित घोटालों के बाद अब सरकारी एम्बुलेंस के इस्तेमाल को लेकर नया विवाद सामने आया है। पूर्व बर्धमान जिले के भातार प्रखंड के बड़बेलुन क्षेत्र में दो सरकारी एम्बुलेंस के कथित तौर पर गायब होने और उनमें से एक के वर्षों तक निजी उपयोग में चलाए जाने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल गर्मा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए स्थानीय थाने में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है।

दो सरकारी एम्बुलेंस थीं, दोनों पर उठे सवाल

भाजपा नेता राजकुमार हाजरा का आरोप है कि बड़बेलुन-1 ग्राम पंचायत के पास स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दो सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध थीं। शुरुआती समय में इनका उपयोग ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधा देने के लिए किया गया, लेकिन कुछ वर्षों बाद दोनों वाहन अचानक गायब हो गए। पिछले सात से आठ वर्षों से स्थानीय लोगों को इन एम्बुलेंस की सुविधा नहीं मिल रही थी, जिससे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

एक एम्बुलेंस दूसरे गांव में निजी तौर पर चलाने का आरोप

राजकुमार हाजरा का दावा है कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने स्वयं मामले की जानकारी जुटानी शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि पंचायत की एक सरकारी एम्बुलेंस दूसरे गांव में किराये पर निजी उपयोग के लिए चलाई जा रही थी। इसके बाद संबंधित वाहन को वापस बड़बेलुन लाया गया। एम्बुलेंस लौटने पर ग्रामीणों ने राहत जताई और नियमित स्वास्थ्य सेवा बहाल करने की मांग की।

दूसरी एम्बुलेंस अब भी लापता

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि दूसरी सरकारी एम्बुलेंस का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकारी वाहनों का निजी इस्तेमाल किया गया तो उससे होने वाली आय किसके पास गई और उसका हिसाब-किताब क्यों नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके।

एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी, जांच पर टिकी निगाहें

भाजपा ने इस मामले में भातार थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच शुरू कर सकती है। फिलहाल पंचायत प्रशासन या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।