शराबबंदी के बाद उभरी नई चुनौती

पटना, 22 जून 2026: बिहार में 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी को सामाजिक सुधार के बड़े कदम केरूप में देखा गया था, लेकिन अब राज्य के सामने एक नई और गंभीर चुनौती उभरती दिखाई दे रही है। ड्रग्स, स्मैक, ब्राउन शुगर, हेरोइन, गांजा, नशीले इंजेक्शन और कोडीनयुक्त कफ सिरप जैसे मादक पदार्थों का बढ़ता नेटवर्क युवाओं को अपनी गिरफ्त में लेता जा रहा है। सरकारी आंकड़े, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड और नशा मुक्ति केंद्रों के अनुभव इस खतरे की गंभीरता को दर्शाते हैं।

शराबबंदी के बाद बढ़ता सूखा नशा

सामाजिक कार्यकर्ताओं और नशा मुक्ति केंद्रों से जुड़े लोगों का कहना है कि शराबबंदी के बाद बड़ी संख्या में युवा तथाकथित ‘सूखे नशे’ की ओर आकर्षित हुए हैं। ब्राउन शुगर, स्मैक, गांजा और सिंथेटिक ड्रग्स के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। राज्य में नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है।


( नारकोटिक ड्रग्स एवं साइकोट्रॉपिक पदार्थ अधिनियम, 1985 NDPS )

मामलों में 150% से अधिक वृद्धि

ड्रग्स से जुड़े NDPS मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है:
- 2019 : 697 मामले
- 2020 : 964 मामले
- 2021 : 1,469 मामले
- 2022 : 1,823 मामले
- 2023 : 2,126 मामले
- 2024 : 2,411 मामले

पांच से छह वर्षों में मामलों में 150 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई।

11 वर्षों में ड्रग्स बरामदगी का बदलता पैटर्न

(राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो NCB) के अनुसार 2015 में केवल 14.37 किलो गांजा, 1.12 किलो

हेरोइन और 1.97 किलो अफीम बरामद हुई थी।

वहीं 2025 तक:

- 28,000 किलो गांजा
- 2,400 किलो अफीम एवं पॉपी स्ट्रॉ
- 3.25 लाख कोडीनयुक्त कफ सिरप की बोतलें
- 3.48 लाख नशीली गोलियां


जब्त की गईं।

23 अप्रैल 2026 तक:

- 21,024.37 किलो गांजा
- 54.048 किलो चरस
- 51.9 किलो हेरोइन/ब्राउन शुगर/स्मैक
- 59.351 किलो अफीम
- 9,06,907 टैबलेट एवं कैप्सूल
- 3,45,309 इंजेक्शन
- 2,82,960 कफ सिरप की बोतलें

बरामद की जा चुकी हैं।

नशीले इंजेक्शन का बड़ा केंद्र बनता बिहार

राष्ट्रीय स्तर पर जब्त 2,75,272 नशीले इंजेक्शनों में से 63,208 इंजेक्शन बिहार से बरामद किए गए। यह कुल बरामदगी का लगभग 25 प्रतिशत है, जो राज्य में बढ़ते इंजेक्शन आधारित नशे की गंभीरता को दर्शाता है।

राजधानी पटना भी नहीं सुरक्षित

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 2023 से फरवरी 2026 तक केवल पटना जिले में 137 किलोग्राम से अधिक स्मैक, हेरोइन और ब्राउन शुगर बरामद की गई। इसके अलावा गांजा, चरस और कोडीनयुक्त कफ सिरप की बड़ी खेपें भी पकड़ी गईं।

किशनगंज बना ड्रग्स तस्करी का संवेदनशील केंद्र

जनवरी से 15 अप्रैल 2026 के बीच किशनगंज में:

- 404 किलो गांजा
- 304 ग्राम ब्राउन शुगर
- 133 ग्राम स्मैक
- 808 ग्राम मार्फिन

बरामद हुई। इस दौरान 20 मामले दर्ज किए गए और 30 तस्करों को गिरफ्तार किया गया।

नेपाल, पूर्वोत्तर और म्यांमार से जुड़ रहे नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार ड्रग्स की सप्लाई नेपाल, म्यांमार और पूर्वोत्तर राज्यों से बिहार पहुंच रही है। कई मामलों में सोशल मीडिया, कोड वर्ड और होम डिलीवरी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

नौ जिलों में अफीम की खेती का खुलासा

बिहार पुलिस की ड्रोन सेल ने 423 किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे कर नौ जिलों में 63 एकड़ अफीम की खेती नष्ट की। सीमावर्ती इलाकों में विशेष निगरानी के लिए नई यूनिट भी तैनात की गई हैं।

5 करोड़ युवाओं के सामने चुनौती

NCRB के अनुसार बिहार में 15 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 5 करोड़ युवा हैं, जो राज्य की कुल आबादी का करीब 32 प्रतिशत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ड्रग्स नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हुआ तो इसका सबसे बड़ा असर इसी युवा आबादी पर पड़ेगा।

बढ़ रहे नशा मुक्ति केंद्र

2016 तक बिहार में लगभग 13-14 नशा मुक्ति केंद्र थे। वर्तमान में केवल पटना में ही 20 से अधिक केंद्र संचालित हैं, जबकि पूरे राज्य में सरकारी और निजी संस्थानों को मिलाकर लगभग 200 केंद्र होने का अनुमान है।

सरकार और पुलिस का दावा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 में NDPS के 2,161 मामले दर्ज किए गए, 3,520 लोगों को गिरफ्तार किया गया तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई। सितंबर 2025 में स्टेट नारकोटिक्स ब्यूरो का गठन भी किया गया। पटना पुलिस का दावा है कि पिछले तीन-चार महीनों में 45 करोड़ रुपये से अधिक के नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं।

निष्कर्ष

ड्रग्स के बढ़ते मामलों, बरामदगी के रिकॉर्ड आंकड़ों, युवाओं में बढ़ती लत और सीमावर्ती तस्करी नेटवर्क को देखते हुए बिहार के सामने चुनौती केवल कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी भी है। आने वाले वर्षों में इस समस्या से निपटने के लिए सरकार, समाज और परिवारों को मिलकर काम करना होगा।