भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत के बाद न्याय की मांग को लेकर महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत में हजारों लोगों की भीड़ जुटी और पुलिस कार्रवाई व सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। ग्रामीणों और परिजनों ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और जल्द जांच कराने की मांग की।

बताया जा रहा है कि भरत भूषण तिवारी पड़ोसी गांव जमानिया की जनसमस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहे थे। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में वह कथित रूप से पुलिसकर्मियों के सामने पिस्तौल लहराते दिखे थे। इसके बाद 17 जून को पुलिस कार्रवाई के दौरान उनकी मौत हो गई।

मामले ने तब और तूल पकड़ा, जब कथित एनकाउंटर से जुड़ा एक अन्य वीडियो वायरल हुआ। परिजनों और ग्रामीणों का दावा है कि वीडियो में भरत तिवारी आत्मसमर्पण की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। परिवार ने घटना को फर्जी एनकाउंटर बताया है। हालांकि, मामले की जांच जारी है और वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। भरत तिवारी की मां की शिकायत पर एसडीपीओ, थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है और उन्हें निलंबित किए जाने की बात सामने आई है।

महापंचायत के दौरान भरत तिवारी के माता-पिता से मिलने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। उनकी तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टरों की टीम भी मौके पर पहुंची। आयोजकों ने इसे गैर-राजनीतिक न्याय आंदोलन बताया, जबकि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी इस मुद्दे से जुड़े नजर आए। अब यह मामला पुलिस जवाबदेही और मानवाधिकार से जुड़े बड़े सवालों के केंद्र में आ गया है।