बिजनौर (उत्तर प्रदेश) | 10 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) बुकिंग के नाम पर की जा रही साइबर ठगी का बड़ा खुलासा हुआ है। बिजनौर पुलिस ने 'ऑपरेशन Cy-Vajra' के तहत ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने AI और ChatGPT जैसे आधुनिक तकनीकी टूल्स की मदद से सरकारी वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें तैयार कर देशभर के लोगों से लाखों रुपये की ठगी की। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप तथा 12,300 रुपये नकद बरामद किए हैं।
15 राज्यों से मिली शिकायतों के बाद खुला राज
पुलिस के अनुसार राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दिल्ली, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर समेत 15 राज्यों से कुल 29 शिकायतें दर्ज हुई थीं। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने परिवहन विभाग की आधिकारिक HSRP वेबसाइट की हूबहू नकल करते हुए फर्जी पोर्टल तैयार किए और लोगों से ऑनलाइन भुगतान करवाकर रकम हड़प ली।
AI और ChatGPT से बनाई गई फर्जी वेबसाइट
पुलिस पूछताछ में पता चला कि गिरोह के मुख्य आरोपी तुषार शर्मा और अरशद ने GoDaddy से डोमेन और होस्टिंग खरीदी। इसके बाद AI आधारित टूल्स और ChatGPT की मदद से ऐसी वेबसाइटें तैयार कीं, जो बिल्कुल सरकारी पोर्टल जैसी दिखाई देती थीं। इसी वजह से लोग असली और नकली वेबसाइट में अंतर नहीं कर सके और आसानी से ठगी का शिकार हो गए।
बैंक खातों में भेजी जाती थी ठगी की रकम
जांच एजेंसियों के मुताबिक वेबसाइट पर जमा होने वाली राशि अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद रकम गिरोह के सदस्यों में बांट दी जाती थी और जिन लोगों के बैंक खाते इस्तेमाल किए जाते थे, उन्हें कमीशन दिया जाता था। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बैंक खातों और संभावित आरोपियों की भी जांच कर रही है।
मुख्य आरोपी पर पहले से दर्ज हैं कई मामले
गिरफ्तार आरोपियों में अनस, तुषार शर्मा, प्रशांत कुमार, मोहम्मद फैजान, मोहित कुमार, अरशद और रेहान शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुख्य आरोपी तुषार शर्मा के खिलाफ पहले से मारपीट, धमकी, अपहरण और पॉक्सो एक्ट से जुड़े कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर जल्द कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि HSRP जैसी सेवाओं के लिए केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल का ही इस्तेमाल करें और किसी भी संदिग्ध वेबसाइट पर ऑनलाइन भुगतान करने से पहले उसकी सत्यता जरूर जांच लें।




