पटना | 7 जुलाई 2026
बिहार सरकार की नई स्टेट हाईवे (SH) टोल नीति को लेकर सियासत तेज हो गई है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता के भारी विरोध के कारण सरकार को निजी वाहनों पर प्रस्तावित टोल वसूली का फैसला वापस लेना पड़ा, लेकिन कमर्शियल वाहनों पर टोल जारी रखना आम लोगों पर अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई का बोझ डालने जैसा है।
'जनता के दबाव में सरकार को झुकना पड़ा'
पटना में जारी बयान में राजेश राठौड़ ने कहा कि सरकार ने स्टेट हाईवे और राज्य के पुलों पर टोल टैक्स लागू कर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की योजना बनाई थी। लेकिन व्यापक जनविरोध और कांग्रेस सहित विपक्ष के विरोध के बाद सरकार को अपने फैसले में आंशिक बदलाव करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह जनता की आवाज़ की जीत है, लेकिन फैसला अभी भी अधूरा है।
कमर्शियल वाहनों पर टोल से बढ़ेगी महंगाई
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि कमर्शियल वाहनों से टोल टैक्स वसूला जाएगा तो उसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से खाद्यान्न, सब्जियां, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ेंगी। अंततः इसका आर्थिक बोझ आम जनता को ही उठाना पड़ेगा।
रोड टैक्स के बाद टोल क्यों?
राजेश राठौड़ ने सरकार से सवाल किया कि जब वाहन खरीदते समय उपभोक्ता पहले से ही रोड टैक्स का भुगतान करते हैं, तो फिर राज्य सरकार स्टेट हाईवे और पुलों पर अलग से टोल टैक्स क्यों वसूलना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह दोहरी वसूली जैसी व्यवस्था है, जिस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
सरकार से फैसले को पूरी तरह वापस लेने की मांग
कांग्रेस ने मांग की है कि जिस तरह निजी वाहनों पर टोल वसूली का निर्णय वापस लिया गया है, उसी तरह कमर्शियल वाहनों पर भी यह आदेश तत्काल वापस लिया जाए। पार्टी का कहना है कि जनता पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए और सरकार को जनहित को प्राथमिकता देते हुए अपनी टोल नीति में संशोधन करना चाहिए।




