पटना, 17 अगस्त 2026 : बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन को लेकर चल रहे विवाद के बीच पटना हाईकोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दे दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद संबंधित शिक्षक अगली सुनवाई तक अपने वर्तमान विद्यालय और पदस्थापन स्थल पर बने रहेंगे। कोर्ट के आदेश को ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर असमंजस में चल रहे शिक्षकों के लिए एक बड़ी राहत माना जा रहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकल पीठ ने सीडब्ल्यूजेसी संख्या 12326/2026 की सुनवाई के दौरान दिया। मामले में औरंगाबाद के कुटुंबा प्रखंड के शिक्षक नरेंद्र कुमार नंद समेत 39 शिक्षकों ने सरकार की स्थानांतरण एवं पदस्थापन नीति को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।
अगली सुनवाई तक ट्रांसफर पर यथास्थिति
सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मामले में वर्तमान स्थिति बरकरार रहेगी। यानी याचिका से जुड़े शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन में अगली सुनवाई तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। पटना हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अपना पक्ष और आवश्यक जवाब प्रस्तुत किया जाएगा।
सरप्लस शिक्षकों के ट्रांसफर पर उठे सवाल
याचिकाकर्ता शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ललित किशोर और अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार सिंह ने अदालत में पक्ष रखा। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि सरप्लस शिक्षकों के नाम पर किए जा रहे स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया में कई विसंगतियां हैं। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर अलग-अलग पत्र जारी किए जाने से स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। बार-बार स्थानांतरण की आशंका के कारण शिक्षकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
39 शिक्षकों ने दाखिल की याचिका
इस मामले में औरंगाबाद जिले के विभिन्न विद्यालयों से जुड़े 39 शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इनमें नरेंद्र कुमार नंद, नीरज कुमार पांडेय, संतोष कुमार सिंह, सुनील कुमार मिश्र, निर्भय कुमार सिंह और कुंदन कुमार सिंह समेत अन्य शिक्षक शामिल हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद याचिकाकर्ता शिक्षकों में खुशी का माहौल है। शिक्षकों का कहना है कि फिलहाल उन्हें ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर बड़ी राहत मिली है।
बिहार के दूसरे शिक्षकों की भी नजर 21 सितंबर पर
हाईकोर्ट के इस आदेश का असर आगे चलकर बिहार के अन्य शिक्षकों पर भी पड़ सकता है। खासकर सरप्लस सूची में शामिल शिक्षक और स्थानांतरण प्रक्रिया से प्रभावित शिक्षक अब 21 सितंबर की सुनवाई पर नजर बनाए हुए हैं। अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि स्थानांतरण एवं पदस्थापन नीति को लेकर अदालत आगे क्या रुख अपनाती है।




