मुजफ्फरपुर, 29 अगस्त 2026 : 17 सितंबर 2012 की रात मुजफ्फरपुर की 12 साल की नवरुणा चक्रवर्ती अपने घर में मेहंदी लगाकर सोई थी। सुबह जब परिवार की आंख खुली तो वह अपने कमरे में नहीं थी। घर का पिछला दरवाजा खुला मिला और लोहे की रॉड मुड़ी हुई थी। करीब 68 दिन बाद घर से सटे नाले में मानव कंकाल मिलने से सनसनी फैल गई। नवरुणा के लापता होने के बाद बिहार पुलिस से लेकर CID और फिर CBI तक ने इस मामले की जांच की। कई लोगों से पूछताछ हुई, गिरफ्तारियां हुईं और जमीन विवाद समेत कई एंगल सामने आए, लेकिन आज तक यह रहस्य पूरी तरह नहीं सुलझ पाया कि नवरुणा का अपहरण किसने किया और उसकी हत्या किसने की।

परीक्षा खत्म होने के बाद मेहंदी लगाने की जिद

17 सितंबर 2012 की शाम मुजफ्फरपुर के जॉन्फर लाल रोड स्थित चक्रवर्ती लेन में अतुल्य चक्रवर्ती अपने परिवार के साथ घर पर थे। उनकी 12 वर्षीय बेटी नवरुणा का अर्द्ध वार्षिक परीक्षा खत्म हुई थी। नवरुणा ने मां से कहा कि वह रात में हाथों में मेहंदी लगाएगी। मां ने मजाक में कहा कि स्कूल खुलने तक मेहंदी का रंग नहीं उतरा तो शिक्षक डांटेंगे। नवरुणा ने जवाब दिया कि स्कूल की चार दिन की छुट्टी है, तब तक रंग फीका पड़ जाएगा। रात करीब नौ बजे परिवार ने साथ खाना खाया। इसके बाद नवरुणा मेहंदी लगाने बैठ गई। कुछ देर बाद वह अपने कमरे में पढ़ने चली गई। रात में पिता अतुल्य ने उसे पढ़ाई करते देखा और सोने के लिए कहा। नवरुणा ने कहा कि हाथों में मेहंदी लगी है, इसलिए वह उसी कमरे में सो जाएगी। पिता ने उसे इजाजत दे दी। यही वह आखिरी बातचीत थी, जो अतुल्य ने अपनी बेटी से की थी।

सुबह 3:30 बजे खुली आंख, बेटी कमरे से गायब

18 सितंबर की तड़के करीब 3:30 बजे अतुल्य की नींद खुली। उन्होंने देखा कि आंगन का बल्ब बंद था। उन्होंने पत्नी से पूछा कि क्या उन्होंने बल्ब बुझाया है। पत्नी ने इससे इनकार किया। इसके बाद मैत्री चक्रवर्ती बेटी के कमरे में पहुंचीं। कमरे का दरवाजा खुला था, लेकिन नवरुणा वहां नहीं थी।परिवार ने घर के अंदर और आसपास उसकी तलाश शुरू की। कुछ ही देर में घर के पीछे का दरवाजा खुला मिला। दरवाजे में लगी लोहे की रॉड भी मुड़ी हुई थी। परिवार को शक हुआ कि नवरुणा को जबरन घर से बाहर ले जाया गया है।

पुलिस में शिकायत, लेकिन नहीं मिला कोई सुराग

करीब दो घंटे तक तलाश करने के बाद परिवार थाने पहुंचा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। आसपास के इलाकों में तलाश की गई और परिवार समेत कई लोगों से पूछताछ हुई, लेकिन नवरुणा का कोई सुराग नहीं मिला। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा। मुजफ्फरपुर से लेकर पटना और दिल्ली तक Justice for Navaruna अभियान चलने लगा। सामाजिक संगठनों और कई संस्थाओं ने भी बच्ची को खोजने की मांग उठाई।

68 दिन बाद घर के पास नाले में मिला मानव कंकाल

नवरुणा के गायब होने के करीब 68 दिन बाद, 26 नवंबर 2012 को पुलिस ने परिवार को सूचना दी कि उनके घर से सटे नाले में मानव कंकाल मिला है। कंकाल के साथ कुछ कपड़े भी मिले। इसके बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई। पुलिस ने नवरुणा के माता-पिता से DNA सैंपल लेने की बात कही। शुरुआत में माता-पिता ने सैंपल देने से इनकार किया। इसके बाद उन पर भी सवाल उठने लगे। परिवार ने आरोप लगाया कि किसी ने उन्हें फंसाने के लिए किसी दूसरे बच्चे की हड्डियां वहां रखी हैं। बाद में CID ने माता-पिता के DNA सैंपल लिए। जांच में सामने आया कि नाले से मिला कंकाल नवरुणा का ही था।

CID ने तीन लोगों को किया गिरफ्तार

जनवरी 2013 में मामले की जांच CID को सौंप दी गई। जांच के दौरान बबलू, श्याम पटेल और सुदीप चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया। सुदीप अतुल्य चक्रवर्ती का पटिदार था। परिवार लगातार मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करता रहा। नवरुणा के माता-पिता तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जनता दरबार में भी पहुंचे। उन्होंने अपनी बेटी के मामले में न्याय और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की। इसके बाद 14 फरवरी 2014 को मामला CID से CBI को सौंप दिया गया।

CBI जांच में जमीन विवाद का एंगल आया सामने

CBI ने मामले की जांच के दौरान परिवार से कई बार पूछताछ की। घर और घटनास्थल की दोबारा जांच की गई। कई लोगों से पूछताछ हुई और कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।जांच के दौरान जमीन विवाद का एंगल प्रमुखता से सामने आया। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि घर के पीछे चलने वाले होटल के मालिक से उनका विवाद था। इसके अलावा जमीन बेचने को लेकर भी कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। CBI ने भी जांच में जमीन कारोबार से जुड़े लोगों पर शक जताया और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया।

2019 में 10 लाख रुपये का इनाम घोषित

नवरुणा मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए CBI ने 2019 में मुजफ्फरपुर में पोस्टर लगाकर सूचना देने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की। इसके बावजूद जांच एजेंसी को ऐसा ठोस सबूत नहीं मिला, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि नवरुणा का अपहरण किसने किया और उसकी हत्या किसने की।

2020 में CBI ने दाखिल की क्लोजर रिपोर्ट

करीब छह साल तक जांच करने के बाद CBI ने 24 नवंबर 2020 को मुजफ्फरपुर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। CBI का कहना था कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर अपराधी के खिलाफ मामला साबित नहीं हो सका। इस तरह नवरुणा के अपहरण और हत्या की गुत्थी आधिकारिक तौर पर अनसुलझी रह गई।

आज भी बेटी के लौटने का इंतजार

नवरुणा की मौत की पुष्टि कंकाल की DNA जांच से हो चुकी है, लेकिन उसके माता-पिता आज भी इस घटना को भूल नहीं पाए हैं। परिवार ने नवरुणा की साइकिल, गुल्लक, गुड़िया, रुमाल और टोपी जैसी चीजें अब तक संभालकर रखी हैं। 12 साल की वह बच्ची जो 17 सितंबर 2012 की रात मेहंदी लगाकर सोई थी, अगली सुबह हमेशा के लिए गायब हो गई। वर्षों की जांच, कई गिरफ्तारियों और अलग-अलग जांच एजेंसियों के प्रयासों के बावजूद एक सवाल आज भी कायम है—नवरुणा को उसके घर से कौन ले गया और उसकी मौत के पीछे असली जिम्मेदार कौन था ? मालूम हो कि नवरुणा की कहानी आज भी बिहार के सबसे चर्चित और रहस्यमयी लापता मामलों में गिनी जाती है।