पटना, 17 अगस्त 2026 : बिहार की राजधानी पटना में सड़क और ट्रैफिक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर के जरिए अब पटना से पुनपुन की यात्रा आसान होने की उम्मीद है। वहीं, दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद पटना के पश्चिमी हिस्से के साथ गया, जहानाबाद, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की ओर जाने वाले लोगों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।

मीठापुर से पुनपुन का सफर 10-15 मिनट में !

मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर शुरू होने के बाद मीठापुर से पुनपुन का सफर करीब 10 से 15 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है। इससे पटना के दक्षिणी हिस्से में रहने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। इस कॉरिडोर का फायदा गया, जहानाबाद, औरंगाबाद और दक्षिण बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों को भी मिलेगा। पटना से गयाजी जाने वाले लोगों के लिए यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है।

11.67 KM लंबा है मीठापुर-महुली-पुनपुन कॉरिडोर

मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर का कुल विस्तार करीब 11.67 किलोमीटर है। यह चार लेन का एलिवेटेड रोड है, जिसमें दोनों दिशाओं में दो-दो लेन हैं। मीठापुर के एजुकेशन हब से रामगोविंद सिंह महुली हॉल्ट तक करीब 8.86 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण किया गया है। इस पर करीब 1,030.59 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। वहीं, महुली हॉल्ट से पुनपुन लक्ष्मण झूला तक करीब 2.20 किलोमीटर का चार लेन एलिवेटेड रोड है। पूरे मीठापुर-सिपारा-महुली-पुनपुन कॉरिडोर की लागत करीब 1,467.72 करोड़ रुपये बताई गई है।

60 KM प्रति घंटे की होगी अधिकतम रफ्तार

एलिवेटेड कॉरिडोर पर वाहनों के लिए अधिकतम 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति निर्धारित की गई है। दोनों तरफ दो-दो लेन होने के कारण यातायात को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

गया, जहानाबाद और औरंगाबाद जाने वालों को भी फायदा

मीठापुर-महुली कॉरिडोर केवल पुनपुन तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं करेगा, बल्कि दक्षिण बिहार की ओर जाने वाले ट्रैफिक के लिए भी महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकता है। गया, जहानाबाद और औरंगाबाद की तरफ जाने वाले लोगों को पटना शहर के भीतरी हिस्सों के ट्रैफिक से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव भी कम हो सकता है।

UHPFRC तकनीक से तैयार हुआ कॉरिडोर

मीठापुर-महुली एलिवेटेड कॉरिडोर की खासियत इसकी निर्माण तकनीक भी है। परियोजना में बिहार में पहली बार Ultra High Performance Fiber Reinforced Concrete (UHPFRC) तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दी गई है। इस तकनीक की मदद से करीब 64 मीटर लंबे स्पैन तैयार किए गए हैं। कॉरिडोर का एलाइनमेंट रेलवे ट्रैक के समानांतर रखा गया है।

साउंड बैरियर और स्ट्रीट लाइट से लैस

एलिवेटेड रोड पर सुरक्षा के लिए दोनों तरफ ऊंचे गार्ड लगाए गए हैं। इसके साथ ही साउंड बैरियर, स्ट्रीट लाइट, एक्सपेंशन ज्वाइंट और रोड मार्किंग जैसे जरूरी कार्य किए गए हैं। इन सुविधाओं से रात में सफर करने वाले वाहन चालकों को भी बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है।

अब दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर पर नजर

पटना के एलिवेटेड रोड नेटवर्क में अगली बड़ी परियोजनाओं में दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है। इसकी लंबाई करीब 25 किलोमीटर होगी और परियोजना का आधे से ज्यादा काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। यह कॉरिडोर दानापुर रेलवे स्टेशन से शुरू होकर बिहटा और कोइलवर तक जाएगा।

389 पिलर पर तैयार हो रहा दानापुर-बिहटा कॉरिडोर

दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए कुल 389 पिलर बनाए जा रहे हैं। परियोजना में दानापुर के पास आरओबी और डबल डेकर ब्रिज जैसे स्ट्रक्चर भी शामिल हैं। दानापुर स्टेशन के पास चार, नेऊरागंज में दो और बिहटा एयरपोर्ट से कोइलवर तक एक रैंप बनाए जाने की जानकारी दी गई है। दानापुर वाले रैंप की ऊंचाई 25 मीटर बताई गई है। इस परियोजना पर करीब 1,969 करोड़ रुपये खर्च होने हैं और इसे जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

AIIMS, IIT और NIT तक आसान होगी पहुंच

दानापुर-बिहटा एलिवेटेड कॉरिडोर के पूरा होने के बाद पटना के पश्चिमी हिस्से की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इससे AIIMS, IIT और NIT जैसे प्रमुख संस्थानों तक पहुंचना आसान हो सकता है। इसके अलावा पटना से उत्तर प्रदेश और दिल्ली की ओर जाने वाले यात्रियों को भी बेहतर सड़क कनेक्टिविटी मिल सकती है।

पटना के ट्रैफिक को मिलेगी नई रफ्तार ?

पटना में लगातार बढ़ रहे एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर नेटवर्क का उद्देश्य शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करना और अलग-अलग इलाकों के बीच यात्रा को आसान बनाना है। मीठापुर-महुली कॉरिडोर और दानापुर-बिहटा परियोजना पूरी होने के बाद पटना की सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक राहत इन परियोजनाओं के पूरी तरह चालू होने और ट्रैफिक प्रबंधन के प्रभावी संचालन पर निर्भर करेगी।