पटना, 17 अगस्त 2026 : जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर ने सोमवार को पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने अपने चेंबर में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ के बाद प्रशांत किशोर ने इसे अपने लिए उत्साह और गौरव का दिन बताया। हालांकि शपथ के बाद उनका बयान सिर्फ औपचारिक नहीं रहा। पीके ने बिहार की राजनीति के अलग-अलग दौर और विचारधाराओं से जुड़े कई बड़े नेताओं का एक साथ नाम लेकर अपनी राजनीतिक सोच का संकेत देने की कोशिश की।
कर्पूरी ठाकुर से सुशील मोदी तक, PK ने गिनाए बड़े नाम
प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस विधानसभा के सदस्य कर्पूरी ठाकुर, श्रीकृष्ण सिंह, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान और सुशील मोदी जैसे नेता रहे हैं, उसका सदस्य बनना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने इन नेताओं के बिहार के लिए योगदान को याद करते हुए कहा कि इनसे प्रेरणा लेकर वह राज्य के लिए काम करने की जिम्मेदारी निभाएंगे। पीके के बयान की खास बात यह रही कि उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं और दलों से जुड़े नेताओं को एक साथ याद किया। इसे उनकी ओर से खुद को किसी एक पारंपरिक राजनीतिक खांचे तक सीमित नहीं रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या पीके ने दिया ‘वैकल्पिक राजनीति’ का संदेश ?
प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार में पारंपरिक राजनीति से अलग मॉडल की बात करते रहे हैं। शिक्षा, रोजगार, सुशासन और विकास उनके राजनीतिक अभियान के प्रमुख मुद्दे रहे हैं। ऐसे में विधानसभा में प्रवेश के मौके पर कर्पूरी ठाकुर से लेकर लालू प्रसाद, नीतीश कुमार और सुशील मोदी तक का उल्लेख कर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह बिहार के राजनीतिक इतिहास और अलग-अलग धाराओं के योगदान को स्वीकार करते हैं। अब देखना होगा कि विधानसभा के भीतर प्रशांत किशोर किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं और उनकी राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
बांकीपुर में BJP के गढ़ को तोड़कर विधानसभा पहुंचे PK
प्रशांत किशोर ने हालिया बांकीपुर उपचुनाव में जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया है। उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों के अंतर से हराया। प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार को 44,827 वोट हासिल हुए। आरजेडी उम्मीदवार रेखा कुमारी गुप्ता तीसरे स्थान पर रहीं। बांकीपुर सीट लंबे समय से बीजेपी के प्रभाव वाली सीट मानी जाती रही है। ऐसे में पीके की जीत को बिहार की राजनीति में नए सियासी समीकरण के संकेत के तौर पर देखा गया।
अब विधानसभा के अंदर कैसी होगी पीके की भूमिका ?
चुनावी जीत के बाद अब प्रशांत किशोर के सामने विधानसभा के भीतर अपनी राजनीतिक भूमिका साबित करने की चुनौती है। रोजगार, शिक्षा, पलायन, उद्योग और सुशासन जैसे मुद्दों पर उनकी रणनीति पर नजर रहेगी। अगर जन सुराज विधानसभा के भीतर अपनी अलग राजनीतिक लाइन बनाए रखता है, तो बिहार की पारंपरिक NDA बनाम महागठबंधन राजनीति के बीच एक तीसरे विकल्प की संभावना पर बहस और तेज हो सकती है।




