पटना | 14 जुलाई 2026
बिहार में मानसून के सक्रिय होते ही कई जिलों में लगातार बारिश का दौर जारी है, लेकिन अब पड़ोसी देश नेपाल में हो रही मूसलाधार बारिश का असर भी राज्य में साफ दिखाई देने लगा है। मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के इलाकों से होकर गुजरने वाली बागमती नदी उफान पर है, जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार सरकार ने पहले से ही व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित राहत और बचाव उपलब्ध कराया जा सके।
89 से अधिक ऊंचे स्थानों पर बनेंगे बाढ़ शरण स्थल
आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश पर राज्यभर में 89 से अधिक स्थानों की पहचान की गई है, जहां जरूरत पड़ने पर अस्थायी बाढ़ शरण स्थल बनाए जाएंगे। ये शरण स्थल स्कूल भवन, पंचायत भवन और अन्य ऊंचे स्थानों पर स्थापित किए जाएंगे, ताकि बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित ठहराया जा सके। इन स्थानों पर सामुदायिक रसोई भी संचालित की जाएगी, जिससे विस्थापित लोगों को भोजन की समस्या का सामना न करना पड़े।
मेडिकल कैंप और मोबाइल हेल्थ टीम रहेंगी तैनात
सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट पर रखा है। बड़े बाढ़ शरण स्थलों पर स्थायी मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे, जहां डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहेंगे। वहीं छोटे शरण स्थलों के लिए मोबाइल मेडिकल टीम गठित की जाएगी, जो दो से तीन राहत शिविरों की जिम्मेदारी संभालेगी और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएगी।
हर पीड़ित का होगा पंजीकरण, मिलेगी जरूरी सुविधाएं
बाढ़ राहत शिविरों में आने वाले सभी लोगों का पंजीकरण किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक शरण स्थल पर रजिस्ट्रेशन काउंटर और कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। इसके अलावा स्वच्छ पेयजल, शौचालय, प्रसूति सुविधा, नवजात शिशुओं के टीकाकरण और छह महीने से दो वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष पोषण आहार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
प्रशासन अलर्ट, लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि नेपाल में लगातार हो रही बारिश के कारण आने वाले दिनों में नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में राहत एवं बचाव दलों को पहले से तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।




