पटना : 28/06/2026
मानसून की रफ्तार सुस्त, देशभर में बारिश का बड़ा घाटा
दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत इस बार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। 27 जून 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार देशभर में सामान्य से करीब 43% कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई में मानसून पूरे देश में सक्रिय हो जाएगा, लेकिन शुरुआती कमी ने खेती, जलाशयों और पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
एल नीनो और IOD की स्थिति क्यों बनी चिंता का कारण?
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार एल नीनो (El Niño) का प्रभाव मानसून पर साफ दिखाई दे रहा है। सामान्य परिस्थितियों में पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (Indian Ocean Dipole-IOD) एल नीनो के असर को कुछ हद तक संतुलित कर देता है, लेकिन इस बार IOD तटस्थ (Neutral) स्थिति में है। ऐसे में मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं मिल पा रही है। मौसम मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) के अनुमान भी पूरे मानसून सीजन में IOD के तटस्थ रहने का संकेत दे रहे हैं।
IMD का पूर्वानुमान क्या कहता है?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही जून से सितंबर के मानसून सीजन के लिए 'Below Normal' (सामान्य से कम) वर्षा का अनुमान जारी कर चुका है। विभाग के अनुसार इस बार 60% संभावना है कि पूरे सीजन में वर्षा सामान्य से 10% या उससे अधिक कम रह सकती है। यदि ऐसा होता है तो कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा बढ़ सकता है।
किन राज्यों में सबसे अधिक बारिश की कमी?
1 जून से 27 जून तक के आंकड़ों में कई राज्यों में गंभीर वर्षा घाटा दर्ज किया गया है।
1. मेघालय – 82% कमी
2. गुजरात – 79%
3. मणिपुर – 71%
4. छत्तीसगढ़ – 68%
5. झारखंड – 66%
6. महाराष्ट्र – 59%
7. उत्तर प्रदेश – 56%
8. ओडिशा – 52%
9. बिहार – 50%
10. मध्य प्रदेश – 41%
दक्षिण भारत के कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में भी 30% से अधिक वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
देश के चार बड़े क्षेत्रों का हाल
क्षेत्रवार विश्लेषण में सबसे अधिक असर मध्य भारत पर देखा गया है, जहां वर्षा में 57% की कमी दर्ज हुई है। इसके अलावा पूर्वोत्तर एवं पूर्वी भारत में 44%, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 30% और उत्तर-पश्चिम भारत में 27% कम बारिश हुई है।
दिल्ली में बारिश नहीं, उमस ने बढ़ाई मुश्किल
राजधानी दिल्ली में बारिश की कमी के बीच गर्मी और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। शनिवार दोपहर लगभग 2:30 बजे 'फील्स लाइक' तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि वास्तविक अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस रहा। करीब 45% आर्द्रता (Humidity) के कारण लोगों को 50 डिग्री से अधिक जैसी गर्मी महसूस हुई।
खेती और जल संकट पर पड़ सकता है असर
कम वर्षा का सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई, सिंचाई, भूजल स्तर और जलाशयों के जल भंडारण पर पड़ सकता है। जिन राज्यों की कृषि मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है, वहां किसान सबसे अधिक चिंता में हैं। यदि जुलाई में मानसून सामान्य गति नहीं पकड़ता, तो कृषि उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पेयजल व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है।
फिलहाल मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में मानसून की गतिविधियां तेज होने की संभावना है, लेकिन शुरुआती 43% वर्षा घाटे की भरपाई कब तक होगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।




