पटना | 6 जुलाई 2026
बिहार में अब राज्य सरकार बड़े पुलों से गुजरने वाले वाहनों से टोल टैक्स वसूलने की तैयारी कर रही है। पथ निर्माण विभाग ने 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले राज्य स्वामित्व के पुलों का सर्वे शुरू कर दिया है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद यह तय किया जाएगा कि किन पुलों पर टोल प्लाजा स्थापित किए जाएंगे और किस दर से शुल्क लिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य राज्य की सड़कों और पुलों के रखरखाव के लिए स्थायी राजस्व जुटाना है। हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल ने 'बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली' को मंजूरी दी है, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्गों की तर्ज पर अब राज्य के बड़े पुलों और स्टेट हाईवे पर भी टोल वसूला जा सकेगा।
94 बड़े पुलों का किया जा रहा सर्वे
पथ निर्माण विभाग के अनुसार राज्य में विभाग के अधीन लगभग 94 बड़े पुल हैं, जिनकी लंबाई 250 मीटर से अधिक है। इन सभी पुलों का तकनीकी सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के दौरान केवल पुल की लंबाई ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े एप्रोच रोड की लंबाई, प्रतिदिन गुजरने वाले वाहनों की संख्या, यातायात का दबाव और आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों की दूरी का भी आकलन किया जा रहा है।
इसी आधार पर तय होगा कि किन पुलों पर टोल वसूली आर्थिक रूप से व्यवहारिक होगी।
इतनी हो सकती है टोल दर
नई नियमावली के अनुसार छोटे निजी वाहनों के लिए न्यूनतम टोल दर 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर प्रस्तावित है। हालांकि अंतिम शुल्क पुल की लंबाई और यातायात के आधार पर तय किया जाएगा। अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अलग-अलग दरें भी निर्धारित की जाएंगी।
इन प्रमुख पुलों पर लग सकता है टोल
सरकार जिन प्रमुख पुलों का अध्ययन कर रही है उनमें—
- कच्चीदरगाह-बिदुपुर गंगा पुल
- बख्तियारपुर-ताजपुर पुल
- आरा-छपरा गंगा पुल
- दरभंगा-करेह नदी पुल
- नवगछिया-कोसी नदी पुल
- फुलतौरा घाट-खगड़िया पुल
- गया-फल्गु नदी पुल
- नालंदा-सकरी नदी पुल
- सहरसा का बलुआहा घाट पुल
- गोपालगंज और बेतिया के बड़े पुल
जैसे कई महत्वपूर्ण पुल शामिल हैं।
निजी एजेंसियां करेंगी टोल वसूली
सरकार टोल संग्रह की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों को सौंपने की योजना बना रही है। इसके लिए चयनित पुलों और स्टेट हाईवे की नीलामी की जाएगी। जो एजेंसी सरकार को सर्वाधिक राजस्व देने का प्रस्ताव देगी, उसे निर्धारित अवधि के लिए टोल संचालन का अधिकार मिल सकता है।
स्थानीय लोगों को मिलेगी राहत
सरकार ने स्थानीय निवासियों को राहत देने का भी प्रावधान किया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों को रियायती मासिक या वार्षिक पास जारी किए जाएंगे। नियमित रूप से सफर करने वाले वाहन मालिक भी एकमुश्त शुल्क देकर वार्षिक पास बनवा सकेंगे।
नए निर्माण के लिए जुटेगा फंड
सरकार का मानना है कि टोल टैक्स से मिलने वाली आय का उपयोग सड़कों और पुलों के बेहतर रखरखाव, मरम्मत और नए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास में किया जाएगा। महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे कई राज्यों में पहले से ही ऐसी व्यवस्था लागू है।
बिहार सरकार को उम्मीद है कि यह नीति राज्य के सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएगी।




