पटना | 6 जुलाई 2026
बिहार में प्रस्तावित पंचायत चुनाव 2026 समय पर कराए जाने को लेकर संशय गहराता जा रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अब तक तीसरे चरण (थर्ड राउंड) की पदवार आरक्षण प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। ऐसे में दिसंबर 2026 तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होने की संभावना कम होती दिखाई दे रही है। चुनाव से जुड़ी कई अहम प्रक्रियाएं अभी शुरुआती स्तर पर भी नहीं पहुंच सकी हैं, जिससे संभावित उम्मीदवारों और मतदाताओं का इंतजार लंबा हो सकता है।
मतदाता सूची और मतदान केंद्रों पर भी काम बाकी
पंचायत चुनाव की तैयारियों के तहत अब तक केवल वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर आबादी का निर्धारण और पदवार आंकड़े प्रकाशित किए गए हैं। वहीं मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन, मतदान केंद्रों का निर्धारण और आरक्षण तय करने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं अभी तक शुरू नहीं हो सकी हैं। इन कार्यों में देरी चुनाव कार्यक्रम को सीधे प्रभावित कर सकती है।
निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल भी खत्म होने वाला
वर्तमान राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद का कार्यकाल 27 जुलाई 2026 को समाप्त हो रहा है। यदि सरकार नए आयुक्त की नियुक्ति समय पर नहीं करती है, तो आयोग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। वहीं नए आयुक्त के पदभार संभालने के बाद चुनावी तैयारियों को गति देने में भी अतिरिक्त समय लगने की संभावना है।
करीब ढाई लाख पदों पर तय होना है आरक्षण
बिहार पंचायतीराज अधिनियम, 2006 के तहत पंचायत चुनाव के लिए जिला स्तर पर राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में आरक्षण तय किया जाता है। इस बार तीसरे चरण के तहत लगभग 2.5 लाख पदों पर नया आरक्षण निर्धारित किया जाना है। इसमें 8,053 मुखिया, 8,053 सरपंच, 11,085 पंचायत समिति सदस्य, 1,160 जिला परिषद सदस्य तथा 1,09,635 वार्ड सदस्य और इतने ही पंच पद शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी बन सकते हैं देरी की वजह
आरक्षण प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन भी अनिवार्य है। विशेष रूप से अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का निर्धारण किए बिना आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती। इससे पहले वर्ष 2022 में भी नगर निकाय चुनाव इसी वजह से लगभग दो महीने तक टल गए थे। ऐसे में पंचायत चुनाव की समयसीमा को लेकर अभी भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।




