बिहार की राजनीति में एक नया संवैधानिक विवाद सामने आया है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से इस मामले में जवाब मांगा है।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष *उपेंद्र कुशवाहा* के पुत्र दीपक प्रकाश 2025 विधानसभा चुनाव के बाद बनी सरकार में पहली बार मंत्री बने थे। उस समय मुख्यमंत्री *नीतीश कुमार* के नेतृत्व वाली कैबिनेट में उन्हें पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बाद में राजनीतिक घटनाक्रम के तहत सरकार में बदलाव हुआ और नई सरकार के गठन के दौरान भी दीपक प्रकाश ने दोबारा मंत्री पद की शपथ ली।

इसी नियुक्ति को चुनौती देते हुए बिहार के राकेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, इसके बावजूद वे लगातार मंत्री पद पर बने हुए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने यह भी पूछा कि क्या दीपक प्रकाश अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से इसकी पुष्टि किए जाने के बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया।

अब इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य बल्कि बिहार की राजनीति में संवैधानिक व्यवस्था की व्याख्या पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।