नई दिल्ली/पटना | 30 जुलाई 2026

बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार से पूछा है कि मंत्री पद की शपथ लेने के छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य न बनने पर भी वह मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने उठाया संवैधानिक सवाल

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामला सीधे तौर पर संविधान और कानूनी प्रावधानों से जुड़ा है। अदालत ने राज्य सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि निर्धारित संवैधानिक अवधि समाप्त होने के बाद भी गैर-सदस्य व्यक्ति मंत्री पद पर किस आधार पर बना हुआ है।

राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी और न्यायालय जो भी आदेश देगा, उसका पालन किया जाएगा।

दो बार मंत्री बने, लेकिन किसी सदन के सदस्य नहीं

दीपक प्रकाश को वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद राज्य मंत्रिमंडल में पंचायती राज मंत्री बनाया गया था। उस समय वे न तो विधायक थे और न ही उन्होंने विधानसभा चुनाव लड़ा था।

बाद में सरकार में बदलाव के बाद भी उन्हें दोबारा पंचायती राज विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। हालांकि अब तक वे बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं बन पाए हैं।

संविधान क्या कहता है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति विधायक या विधान परिषद सदस्य बने बिना मंत्री नियुक्त होता है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना आवश्यक होता है। ऐसा नहीं होने पर वह मंत्री पद पर बने रहने का अधिकार खो देता है।

27 अगस्त की सुनवाई पर टिकीं निगाहें

अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट बिहार सरकार के जवाब पर विचार करेगा। मामले के नतीजे का असर दीपक प्रकाश के मंत्री पद और आगे की राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। बताते चलें कि दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं और बिहार में एनडीए की सरकार में शािमल हैं।