बीरभूम | 14 जुलाई 2026

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय तक अलग-अलग गुटों का नेतृत्व करने वाले वरिष्ठ नेता अनुब्रत मंडल (केष्ट) और काजल शेख अब एक ही मंच पर दिखाई दे रहे हैं। दोनों नेताओं की बढ़ती राजनीतिक नजदीकियों ने जिले के पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खासकर 21 जुलाई को कोलकाता में आयोजित होने वाली टीएमसी की शहीद दिवस रैली से पहले बदले इस सियासी समीकरण को काफी अहम माना जा रहा है।

दो गुटों के बीच कम हुई दूरी

बीरभूम में लंबे समय से अनुब्रत मंडल और काजल शेख अलग-अलग गुटों के प्रमुख चेहरे माने जाते रहे हैं। लेकिन हाल के घटनाक्रम में दोनों नेताओं के एक साथ आने से संगठन के भीतर नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। इससे दोनों गुटों से जुड़े कार्यकर्ता असमंजस की स्थिति में हैं और आगे की रणनीति को लेकर स्पष्ट संकेत का इंतजार कर रहे हैं।

21 जुलाई की रैली बनी पहली बड़ी परीक्षा

टीएमसी की 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली को पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न माना जाता है। ऐसे में बीरभूम से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करना नेतृत्व की प्राथमिकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस रैली में दोनों नेताओं की संयुक्त मौजूदगी संगठनात्मक एकता का बड़ा संदेश दे सकती है।

नेताओं ने दिया एकजुटता का संदेश

अनुब्रत मंडल ने कहा कि पार्टी के भीतर किसी प्रकार का मतभेद नहीं है और सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर रैली में शामिल होंगे। वहीं काजल शेख ने भी संगठन को मजबूत बनाने और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की बात कही।

भाजपा ने साधा निशाना

इस घटनाक्रम पर भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा है। जिला भाजपा अध्यक्ष उदय शंकर बनर्जी ने आरोप लगाया कि टीएमसी के भीतर लगातार बदलते राजनीतिक समीकरण उसकी आंतरिक गुटबाजी को उजागर करते हैं। उनका कहना है कि सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए पार्टी नेतृत्व बार-बार नए राजनीतिक समझौते कर रहा है।

बदलते समीकरणों पर टिकी राजनीतिक नजर

फिलहाल बीरभूम की राजनीति में अनुब्रत मंडल और काजल शेख की बढ़ती नजदीकियों को आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली पर है, जहां यह स्पष्ट होगा कि यह नई राजनीतिक एकजुटता संगठन को कितनी मजबूती देती है।