पटना, 17 अगस्त 2026 : बिहार-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भारत-नेपाल बॉर्डर पर 24 घंटे गश्त सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत सीमा से जुड़े 70 पुलिस थानों को 194 SSB BOP के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करना होगा। सोमवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा, सीमा पार अपराध, नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी, आतंकवाद और आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई।

सात सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा होगी मजबूत

बैठक में बिहार के नेपाल से सटे सात जिलों की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष चर्चा हुई। इनमें पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। बिहार की नेपाल से लगी सीमा करीब 735 किलोमीटर लंबी है। इस पूरे इलाके में सुरक्षा के लिए 194 SSB बॉर्डर आउटपोस्ट और 70 पुलिस थाने सक्रिय हैं। मुख्य सचिव ने दोनों एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया है।

नशे और हथियारों की तस्करी पर जीरो टॉलरेंस

सीमा पर नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी रोकने के लिए पुलिस और उत्पाद विभाग को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को नशे से जुड़े मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने और PIT-NDPS कानून के प्रभावी इस्तेमाल को कहा गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार सीमावर्ती जिलों में अब तक 20,625 किलो गांजा, 61.85 किलो चरस और 1,98,656 नशीली गोलियां समेत अन्य मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। इन मामलों में 1,023 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है।

फर्जी आधार और सिमबॉक्स फ्रॉड पर भी नजर

बॉर्डर सिक्योरिटी के साथ-साथ फर्जी आधार, सिमबॉक्स फ्रॉड और शेल कंपनियों के जरिए होने वाली आर्थिक गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। आर्थिक अपराध इकाई और जिला पुलिस को ऐसे नेटवर्क के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। सभी बैंक शाखाओं, खासकर सहकारी बैंकों में नकली नोट पहचानने वाली मशीनों को पूरी तरह चालू रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

सीमावर्ती गांवों की कनेक्टिविटी पर भी जोर

बिहार सरकार ने बॉर्डर से जुड़े गांवों के विकास और कनेक्टिविटी को भी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बनाया है। वाइब्रेंट विलेज परियोजना के तहत 1,105 परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा सीमावर्ती गांवों में मोबाइल और टेलीकॉम कनेक्टिविटी बेहतर करने पर भी जोर दिया गया है।