पटना, 21 अगस्त 2026 : बिहार में चीनी मिलों और बगास से बिजली उत्पादन करने वाले प्लांटों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग (BERC) ने गन्ने की खोई यानी बगास (Bagasse) से बिजली उत्पादन और उसकी खरीद से जुड़े नियमों में एक बदलाव किया है। नई व्यवस्था से छोटी चीनी मिलों और बिजली प्लांटों के लिए बिजली उत्पादन करना आसान हो सकेगा। नए नियमों के तहत अब दो मेगावाट तक क्षमता वाले छोटे बिजली संयंत्र भी इस व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे। पहले इसकी सीमा पांच मेगावाट थी।
15 साल की जगह अब पांच साल का PPA
नियमों में सबसे बड़ा बदलाव बिजली खरीद समझौते यानी Power Purchase Agreement (PPA) की अवधि को लेकर किया गया है। पहले बगास से बनने वाली बिजली की खरीद के लिए 15 साल का समझौता किया जाता था। अब इसकी अवधि घटाकर पांच साल कर दी गई है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग के मुताबिक बगास की कीमत और बिजली उत्पादन की लागत समय के साथ बदल सकती है। ऐसे में कम अवधि का समझौता बिजली उत्पादकों को बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार बेहतर विकल्प तलाशने में मदद कर सकता है।
सालाना बिजली सप्लाई का लक्ष्य 53% से घटकर 25%
चीनी मिलों के लिए एक और अहम राहत सालाना बिजली आपूर्ति के लक्ष्य में दी गई है। पहले बिजली प्लांट को अपनी कुल क्षमता की कम से कम 53 प्रतिशत बिजली सालाना सप्लाई करनी होती थी। अब इस न्यूनतम लक्ष्य को घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। दरअसल गन्ने की पेराई का मुख्य सीजन आमतौर पर अक्टूबर से फरवरी के बीच रहता है। ऐसे में बगास की उपलब्धता पूरे साल एक जैसी नहीं रहती। इसी वजह से सालभर 53 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति का लक्ष्य पूरा करना छोटे प्लांटों के लिए मुश्किल माना जा रहा था। अब लक्ष्य पूरा नहीं करने पर बची हुई बिजली की कमी पर निर्धारित दर के आधे के बराबर जुर्माने का प्रावधान रहेगा।
एक कंपनी की कई मिलों के लिए अलग-अलग बोली की सुविधा
नई व्यवस्था में एक मिल, एक बोली की बाध्यता भी खत्म कर दी गई है। अगर किसी कंपनी के पास एक से ज्यादा चीनी मिल या बिजली संयंत्र हैं तो वह प्रत्येक मिल के लिए अलग-अलग बोली लगा सकेगी। इस बदलाव से ज्यादा कंपनियों के टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने की उम्मीद है। प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर बिजली वितरण कंपनियों को भी अपेक्षाकृत बेहतर दरों पर बिजली मिलने की संभावना है।
100 मेगावाट बिजली खरीद का रास्ता आसान
नए नियमों से साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के लिए बगास आधारित बिजली खरीदना आसान हो सकता है। दोनों कंपनियों के लिए कुल करीब 100 मेगावाट बिजली खरीद की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। बगास से उत्पादित बिजली सीधे ट्रांसमिशन ग्रिड में भेजी जाएगी, जिससे इसका इस्तेमाल बिजली आपूर्ति व्यवस्था में किया जा सकेगा।
बिहार में कितनी है बगास से बिजली बनाने की क्षमता ?
फिलहाल बिहार की करीब आठ चीनी मिलों में 120 से 130 मेगावाट बगास आधारित बिजली उत्पादन की क्षमता बताई गई है। गन्ने की पेराई के सीजन में इनमें से लगभग 50 से 70 मेगावाट बिजली प्रतिदिन ग्रिड को मिलती है। नए नियम लागू होने के बाद छोटी चीनी मिलों और बिजली उत्पादकों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। इससे एक तरफ चीनी मिलों को अपनी अतिरिक्त बगास का बेहतर इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ राज्य के बिजली तंत्र को स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त बिजली मिल सकती है।
किसानों और बिजली क्षेत्र के लिए क्यों अहम है फैसला ?
गन्ने की पेराई के बाद बचने वाली खोई यानी बगास का इस्तेमाल बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। नई व्यवस्था से चीनी मिलों को इस बायोमास ईंधन का बेहतर व्यावसायिक इस्तेमाल करने का अवसर मिल सकता है। अगर ज्यादा चीनी मिलें बिजली उत्पादन की प्रक्रिया से जुड़ती हैं तो इससे स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ सकता है और मिलों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकते हैं।




