पटना | 7 जुलाई 2026

पटना: बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि राज्य की भविष्य की राजनीति का संकेत देने वाला मुकाबला माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट खाली हुई है। अब इस सीट पर होने वाला चुनाव सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है।

सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) पहली बार स्वयं चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। अब तक विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए रणनीति तैयार करने वाले पीके के लिए यह चुनाव उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक स्वीकार्यता की पहली बड़ी परीक्षा होगा। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जबकि कांग्रेस अपने फैसले को अंतिम रूप देने की तैयारी में है।

महागठबंधन से समर्थन की मांग, राजद ने नहीं मानी बात

प्रशांत किशोर ने चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ महागठबंधन से समर्थन की अपील की थी। हालांकि, राजद ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजद किसी भी कीमत पर विपक्ष में तेजस्वी यादव के समानांतर नया चेहरा मजबूत नहीं होने देना चाहता। यदि पीके को इस चुनाव में राजद से अधिक वोट मिलते हैं, तो विपक्ष की राजनीति में नया शक्ति संतुलन देखने को मिल सकता है।

राजद की रणनीति पर उठ रहे सवाल

राजद पहले भी विपक्ष के अन्य नेताओं को मजबूत होने से रोकने की रणनीति अपनाता रहा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बेगूसराय सीट पर कन्हैया कुमार के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारना और 2024 में पूर्णिया सीट पर पप्पू यादव को कांग्रेस का टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने की स्थिति पैदा होना इसी रणनीति का हिस्सा माना जाता है।

बीजेपी के लिए भी प्रतिष्ठा की लड़ाई

बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले लगभग तीन दशकों से बीजेपी का मजबूत गढ़ रही है। पहले नवीन किशोर और बाद में उनके पुत्र नितिन नवीन लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। ऐसे में बीजेपी के लिए इस सीट को बचाए रखना संगठन और नेतृत्व की मजबूती का प्रतीक होगा। वहीं, यदि विपक्ष यहां मजबूत चुनौती देता है, तो आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।

बांकीपुर से निकलेगा भविष्य की राजनीति का संदेश

हालांकि इस उपचुनाव के परिणाम से सरकार के बहुमत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इसके राजनीतिक मायने काफी बड़े होंगे। एक ओर प्रशांत किशोर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश करेंगे, तो दूसरी ओर तेजस्वी यादव विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे के रूप में अपनी स्थिति बचाने का प्रयास करेंगे। वहीं बीजेपी अपने पारंपरिक गढ़ को बचाकर राजनीतिक बढ़त बनाए रखना चाहेगी। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।