पटना: बिहार विधानमंडल का बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाला यह सत्र 20 जुलाई से 25 जुलाई तक आयोजित होगा। सत्र की औपचारिक अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच कई अहम मुद्दों पर तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है।
हालांकि, इस बार का मानसून सत्र एक और वजह से ऐतिहासिक रहने वाला है। पिछले 21 वर्षों में पहली बार ऐसा होगा जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानमंडल की कार्यवाही का हिस्सा नहीं होंगे। लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में सदन का नेतृत्व करने वाले नीतीश कुमार की अनुपस्थिति विधानसभा की कार्यवाही में साफ महसूस की जाएगी।
21 वर्षों बाद सदन में नहीं होंगे नीतीश कुमार
बिहार की राजनीति में दो दशक से अधिक समय तक केंद्रीय भूमिका निभाने वाले नीतीश कुमार लगातार विधानमंडल की कार्यवाही में सक्रिय रहते थे। वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने लगभग हर महत्वपूर्ण विधानसभा और विधान परिषद सत्र में हिस्सा लिया।
फरवरी 2026 में आयोजित बजट सत्र के दौरान भी मुख्यमंत्री के रूप में वे सदन में मौजूद थे। लेकिन अब मुख्यमंत्री पद पर बदलाव के बाद इस बार वह सदन की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी गैरमौजूदगी विधानसभा की कार्यवाही को पहले से अलग बनाएगी।
मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी की पहली बड़ी परीक्षा
यह मानसून सत्र मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए भी काफी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद विधानसभा के भीतर विपक्ष के तीखे सवालों और हमलों का सामना करने का यह उनका पहला बड़ा अवसर होगा।
सरकार की ओर से विकास कार्यों, वित्तीय प्रबंधन और नई योजनाओं का बचाव किया जाएगा, जबकि विपक्ष कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है।
पहले दिन पेश हो सकता है 50 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट
सूत्रों के अनुसार सरकार मानसून सत्र के पहले ही दिन करीब 50 हजार करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट (Supplementary Budget) सदन में पेश कर सकती है।
इसके अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयकों और वित्तीय प्रस्तावों को भी इसी सत्र में पारित कराने की तैयारी की गई है। सरकार का प्रयास रहेगा कि सीमित अवधि वाले इस सत्र में अधिक से अधिक विधायी कार्य पूरे किए जाएं।
विपक्ष के निशाने पर होंगे कई बड़े मुद्दे
राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और महागठबंधन के अन्य दलों ने सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है।
विपक्ष जिन प्रमुख मुद्दों को सदन में उठाने की तैयारी कर रहा है, उनमें शामिल हैं—
- बिहार में बढ़ते अपराध
- कानून-व्यवस्था की स्थिति
- सरकारी विभागों में कथित टेंडर अनियमितताएं
- प्रशासनिक भ्रष्टाचार
- सुरक्षा व्यवस्था में कमी
- रिशुश्री प्रकरण
- विभिन्न विभागों में कथित वित्तीय गड़बड़ियां
विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही और उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
बिलौटी पुलिस कार्रवाई का मामला भी गरमा सकता है सदन
मानसून सत्र में भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस कार्रवाई का मामला भी जोरदार तरीके से उठने की संभावना है।
इस घटना में भरत तिवारी की मौत के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। विपक्ष लगातार इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ एनडीए के कुछ सहयोगी दलों और नेताओं ने भी संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
टेंडर घोटाले से लेकर भ्रष्टाचार तक पर होगी घेराबंदी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष इस सत्र में सरकार को कई मोर्चों पर एक साथ घेरने की कोशिश करेगा।
मुख्य मुद्दों में शामिल रह सकते हैं—
- कथित टेंडर घोटाला
- बढ़ते अपराध
- भोजपुर पुलिस कार्रवाई
- कानून-व्यवस्था
- भ्रष्टाचार के आरोप
- प्रशासनिक जवाबदेही
वहीं सरकार इन आरोपों का जवाब विकास कार्यों, नई योजनाओं, वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर देने की तैयारी कर रही है।
हंगामेदार रहने के आसार
सिर्फ पांच दिनों तक चलने वाले इस मानसून सत्र के दौरान सदन में तीखी बहस, नारेबाजी और कई बार कार्यवाही बाधित होने की भी संभावना जताई जा रही है।
कार्य मंत्रणा समिति की बैठकों से लेकर विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही तक सत्ता पक्ष और महागठबंधन के बीच तीखी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल सकती है।
ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले होने वाला यह मानसून सत्र बिहार की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है, जहां सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाएगी तो विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों पर उसे कठघरे में खड़ा करने की पूरी कोशिश करेगा।




