मैड्रिड/रबात | 1 अगस्त

मोरक्को से स्पेन के अफ्रीकी शहर सियुटा (Ceuta) की ओर बड़े पैमाने पर हुए प्रवासी संकट ने पूरे यूरोप की चिंता बढ़ा दी है। इस सप्ताह करीब 50 हजार लोगों ने सीमा पार करने की कोशिश की, जिसमें कम से कम 57 लोगों की मौत हो गई। अधिकांश लोगों की जान समुद्र में डूबने या सीमा पर मची भगदड़ के दौरान गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज को स्वयं सियुटा पहुंचना पड़ा।

क्यों उमड़ी इतनी बड़ी भीड़?

रिपोर्टों के अनुसार, मोरक्को में बढ़ती बेरोजगारी और बेहतर भविष्य की तलाश इस पलायन की सबसे बड़ी वजह रही। इसके अलावा स्पेन की अदालत के एक हालिया फैसले के बाद सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल गई कि स्पेन पहुंचना पहले की तुलना में आसान हो गया है। बताया जा रहा है कि मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क ने भी इस भ्रम को बढ़ावा दिया, जिसके बाद हजारों लोग अचानक सीमा की ओर निकल पड़े।

सियुटा पहुंचकर टूट गया 'यूरोप का सपना'

सीमा पार करने में सफल हुए कई लोगों को सियुटा पहुंचने के बाद भोजन, आश्रय और अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं। चूंकि सियुटा स्पेन की मुख्य भूमि से अलग स्थित है, इसलिए अधिकांश प्रवासी यूरोप के अन्य हिस्सों तक भी नहीं पहुंच सके। मजबूरी में बड़ी संख्या में लोग वापस मोरक्को लौटने लगे।

स्पेन ने शुरू की वापसी की प्रक्रिया

स्पेन सरकार ने इस घटना को देश की क्षेत्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती बताया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत वापस भेजा जाएगा। साथ ही सीमा सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

यूरोप में बढ़ी सुरक्षा, राजनीति भी गरमाई

घटना के बाद इटली ने स्पेन से आने वाले गैर-यूरोपीय नागरिकों की अतिरिक्त जांच शुरू कर दी है, जबकि फ्रांस ने भी अपनी सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी है। यूरोपीय आयोग ने कहा है कि यूरोपीय संघ में प्रवेश करने वाले सभी लोगों को तय नियमों का पालन करना होगा। इस बीच, स्पेन की विपक्षी पार्टियों और अमेरिका की ओर से भी सरकार की प्रवासन नीति पर सवाल उठाए गए हैं।