काबुल, 3 अगस्त 2026 :

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने के संकेत दिए हैं। तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि काबुल इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहता और दोनों देशों के बीच व्यापार तथा सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए। मुजाहिद ने आरोप लगाया कि दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी के लिए पाकिस्तान की नीतियां जिम्मेदार रही हैं। उन्होंने कहा कि सीमा मार्गों के बंद रहने और व्यापारिक गतिविधियों पर लगी पाबंदियों से अफगान कारोबारियों को भारी नुकसान हुआ है।

व्यापार पर पड़ा असर

पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव का सबसे अधिक असर अफगानिस्तान के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ा है। पहले अफगानिस्तान अपने फल, सूखे मेवे और अन्य उत्पाद पाकिस्तान के रास्ते भारत सहित कई देशों तक भेजता था। वहीं भारत से चावल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात भी इसी मार्ग से होता था।

सीमा विवाद बढ़ने के बाद भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार का बड़ा हिस्सा ईरान के चाबहार बंदरगाह के जरिए होने लगा। हालांकि क्षेत्रीय परिस्थितियों और समुद्री मार्गों पर बढ़ी चुनौतियों के कारण यह विकल्प भी पूरी तरह सुगम नहीं रह गया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच सीमित स्तर पर हवाई कार्गो के जरिए व्यापार जारी है।

पाकिस्तान पर लगाए आरोप

जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा सीमा मार्गों को बंद करने और अफगान व्यापारियों के लिए बाधाएं खड़ी करने से दोनों देशों के संबंध और अधिक खराब हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी पक्ष के हित में नहीं है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।

टीटीपी को लेकर दोनों देशों में मतभेद

पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान में मौजूद तत्व तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को समर्थन और शरण देते हैं, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान के भीतर हमलों के लिए किया जाता है। दूसरी ओर तालिबान सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि टीटीपी पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और अफगान सरकार का उससे कोई संबंध नहीं है।

भारत-अफगान संबंध भी चर्चा में

हाल के महीनों में भारत और तालिबान सरकार के बीच बढ़ते संपर्कों पर भी पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है। पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों की ओर से पहले भारत और तालिबान के रिश्तों पर सार्वजनिक टिप्पणियां की गई थीं, जिसके बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी तेज हुई थी। अब तालिबान की ओर से पाकिस्तान के साथ संवाद और रिश्ते सुधारने की इच्छा जताए जाने को दक्षिण एशिया की बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच सीमा सुरक्षा, आतंकवाद और व्यापार जैसे मुद्दों पर मतभेद अभी भी बरकरार हैं, इसलिए आगे की प्रगति दोनों पक्षों की बातचीत पर निर्भर करेगी।