इस्लामाबाद, 1 अगस्त 2026 : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलाकोट में 27 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के बाद विरोध की लहर अब पूरे पाकिस्तान में फैल गई है। राजधानी इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर और कराची सहित कई बड़े शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की सरकार और पाकिस्तानी सेना पर नागरिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच, गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की रिहाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की।

रावलाकोट घटना के विरोध में देशभर में प्रदर्शन

प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थन में आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने इंटरनेट बंद करने, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और कथित दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाया जा रहा है।

इस्लामाबाद में उमड़ी भीड़

राजधानी इस्लामाबाद के एफ-10 मार्केट इलाके में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। रैली का नेतृत्व पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर मुश्ताक अहमद खान ने किया। उन्होंने रावलाकोट में हुई कथित पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मृतकों और घायलों के लिए न्याय की मांग उठाई। रैली में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न कश्मीरी समूहों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार नागरिकों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

लाहौर में सुरक्षा कड़ी, कई लोगों को हिरासत में लेने का दावा

लाहौर में प्रदर्शन से पहले प्रेस क्लब और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई मार्गों को बंद कर दिया गया ताकि बड़ी संख्या में लोग एकत्र न हो सकें। इसके बावजूद शहर के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोगों को केवल PoK का झंडा लेकर चलने या लहराने के आरोप में हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।

पंजाब सरकार प्रदर्शनकारियों के निशाने पर

लाहौर में प्रदर्शनकारियों ने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की सरकार की भी आलोचना की। उनका आरोप था कि कश्मीर के मुद्दे पर राजनीति करने वाली सरकार अब कश्मीरियों के समर्थन में होने वाले प्रदर्शनों को रोक रही है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई स्थानों पर एहतियातन गिरफ्तारियां की गईं, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।

फिलिस्तीन व बलूचिस्तान का मुद्दा भी उठा

प्रदर्शन के दौरान कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि पाकिस्तान में अब फिलिस्तीन, कश्मीर और बलूचिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी खुलकर आवाज उठाने की आजादी सीमित होती जा रही है। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण सभाओं और विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाकर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।

लगातार बढ़ रहा असंतोष

रावलाकोट में 27 जुलाई को हुई कथित पुलिस कार्रवाई के बाद शुरू हुआ विरोध अब राष्ट्रीय स्तर पर फैलता दिखाई दे रहा है। प्रदर्शनकारी नागरिक अधिकारों की सुरक्षा, बेहतर प्रशासन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।