वॉशिंगटन, 1 अगस्त 2026 |
अमेरिका ने अपने वीजा बॉन्ड (Visa Bond) प्रोग्राम को स्थायी रूप से लागू करने का फैसला किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, अब कुछ चयनित देशों के B-1 (बिजनेस) और B-2 (टूरिस्ट) वीजा आवेदकों से वीजा जारी करने से पहले 20,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 19 लाख रुपये) तक का सिक्योरिटी बॉन्ड जमा कराया जा सकता है। यह नया नियम 3 अगस्त से प्रभावी होगा।
किन देशों पर लागू होगा नियम ?
अमेरिकी सरकार के अनुसार यह व्यवस्था फिलहाल लगभग 50 देशों के नागरिकों पर लागू होगी। इनमें अधिकांश अफ्रीकी देश शामिल हैं। इसके अलावा बांग्लादेश, नेपाल और भूटान भी इस सूची में हैं।
भारत फिलहाल इस सूची में शामिल नहीं है, इसलिए भारतीय नागरिकों पर यह नियम लागू नहीं होगा।
क्यों लाया गया नया नियम ?
अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट की समीक्षा में पाया गया कि सिक्योरिटी बॉन्ड व्यवस्था से वीजा धारकों द्वारा वीजा शर्तों का बेहतर पालन किया गया और वीजा अवधि समाप्त होने के बाद अमेरिका में अवैध रूप से रुकने (Visa Overstay) के मामलों में कमी आई।
कितनी होगी बॉन्ड राशि?
पहले पायलट प्रोग्राम के तहत 5,000, 10,000 और 15,000 डॉलर तक का बॉन्ड लिया जाता था। नए स्थायी नियम में 5,000 डॉलर का विकल्प समाप्त कर दिया गया है और अधिकतम सीमा बढ़ाकर 20,000 डॉलर कर दी गई है।
हालांकि, यह बॉन्ड प्रत्येक आवेदक से नहीं लिया जाएगा। अंतिम निर्णय संबंधित कांसुलर अधिकारी परिस्थितियों के आधार पर करेंगे।
फैसले पर उठे सवाल
इमिग्रेशन और मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी सिक्योरिटी राशि कई लोगों के लिए अमेरिका की यात्रा को मुश्किल बना सकती है। आलोचकों का यह भी कहना है कि हाल के वर्षों में लागू किए गए सख्त इमिग्रेशन नियम कानूनी यात्रियों पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ा रहे हैं। इससे यहां आने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।




