लखनऊ, 17 अगस्त। उत्तर प्रदेश में अपना कारोबार शुरू करने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए योगी सरकार ने नई स्टार्टअप नीति के तहत कई अहम प्रोत्साहन का ऐलान किया है। नई नीति का उद्देश्य युवाओं को स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना, शुरुआती आर्थिक दबाव कम करना और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। इसके तहत पात्र नई कंपनियों को शुरुआती तीन वर्षों तक कर्मचारियों के EPF और ESI में कंपनी की ओर से जमा होने वाली राशि के खर्च में सरकारी सहायता मिलेगी। इसके अलावा पेटेंट कराने के लिए 50 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद का प्रावधान भी बताया गया है।

तीन साल तक EPF-ESI में मिलेगी राहत

नई स्टार्टअप नीति के तहत शुरुआती तीन साल तक कर्मचारियों के EPF और ESI में कंपनी के हिस्से की राशि का खर्च सरकार उठाएगी। स्टार्टअप शुरू करने के बाद शुरुआती दौर में कर्मचारियों की सैलरी और अन्य वैधानिक खर्च कंपनियों पर बड़ा वित्तीय दबाव डालते हैं। ऐसे में यह सहायता नई कंपनियों को अपने कारोबार को स्थिर करने में मदद कर सकती है।

पेटेंट के लिए 50 लाख रुपये तक की सहायता

सरकार ने नवाचार और नई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट से जुड़ी आर्थिक सहायता का भी प्रावधान किया है। पात्र स्टार्टअप को पेटेंट कराने के खर्च के लिए 50 लाख रुपये तक की मदद मिल सकती है। इससे नए उत्पाद, तकनीक और बिजनेस आइडिया विकसित करने वाले युवाओं को अपने नवाचार को सुरक्षित कराने में आर्थिक सहारा मिलेगा।

रोजगार बढ़ाने पर भी सरकार का जोर

नीति का एक प्रमुख उद्देश्य स्टार्टअप के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाना है। EPF-ESI में शुरुआती राहत मिलने से कंपनियों को अपनी टीम तैयार करने और कारोबार के विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे प्रदेश में नए उद्यमों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।

युवाओं को अपना कारोबार शुरू करने का प्रोत्साहन

सरकार की इस पहल का लक्ष्य युवाओं को नौकरी खोजने के साथ-साथ रोजगार देने वाला उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करना है। हालांकि, इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अन्य शर्तों को संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरा करना होगा।