लखनऊ, 14 अगस्त। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 में हुए देश के विभाजन को कांग्रेस की कथित कमजोरी और कायरता का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल देश के प्रधानमंत्री होते या नरेंद्र मोदी जैसा मजबूत नेतृत्व देश के पास होता, तो भारत का विभाजन नहीं होता और कोई भी देश का बाल भी बांका नहीं कर पाता। मुख्यमंत्री शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
विभाजन के दौरान हिंसा और विस्थापन का जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 के विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिंसा और विस्थापन का सामना करना पड़ा। उन्होंने विशेष रूप से हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख समुदायों के लोगों के विस्थापन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करने का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को उस दौर की परिस्थितियों और उससे मिली सीख से अवगत कराना है।
आपसी अंतर्विरोध को बताया गुलामी का कारण
सीएम योगी ने कहा कि भारत के लंबे समय तक गुलाम रहने के प्रमुख कारणों में आपसी अंतर्विरोध भी शामिल रहा। उनके मुताबिक जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर पैदा हुए मतभेदों तथा आपसी संघर्ष ने समाज को कमजोर किया। इसका परिणाम यह हुआ कि विदेशी शक्तियों के खिलाफ देश सामूहिक रूप से मजबूती से खड़ा नहीं हो सका।
शत्रु संपत्तियों को लेकर कांग्रेस पर आरोप
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विभाजन के बाद पाकिस्तान से भारत आए हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी, लेकिन उनके साथ अपेक्षित न्याय नहीं हुआ। उन्होंने कांग्रेस शासन के दौरान शत्रु संपत्तियों और जमीनों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि इन संपत्तियों की उचित व्यवस्था के बजाय बंदरबांट हुई।
सपा-कांग्रेस की विचारधारा पर निशाना
योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की मानसिकता आज भी विभाजनकारी है। उन्होंने कहा कि इन दलों की राजनीति देश और समाज को बांटने वाली है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे इतिहास की गलतियों से सीख लेते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए काम करें।
उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करना केवल अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समाज को एकजुट करने का माध्यम होना चाहिए।




