कानूनी प्रक्रिया में इंसानी नियंत्रण जरूरी
नई दिल्ली | 2 जुलाई 2026
सुप्रीम कोर्ट ने Essel Infraprojects के दिवालियापन मामले में NCLT और NCLAT के आदेश रद्द करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में AI के अंधाधुंध इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने पाया कि NCLT ने अपने फैसले में AI से तैयार नकली और अस्तित्वहीन कानूनी उदाहरणों (Fake Precedents) का हवाला दिया था।
क्या है मामला?
यह मामला 87.43 करोड़ रुपये के बकाया दावे से जुड़ा है। Jammu & Kashmir Bank की याचिका पर NCLT ने 28 अगस्त 2024 को दिवाला प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी थी, जिसे 11 सितंबर 2025 को NCLAT ने भी बरकरार रखा। इसके बाद कंपनी की निलंबित निदेशक पूजा रमेश सिंह सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि AI द्वारा तैयार नकली जानकारी का कानून में इस्तेमाल "मिथाइल आइसोसाइनेट गैस रिसाव" की तरह अदृश्य, खतरनाक और विनाशकारी है, जो न्यायिक प्रक्रिया की बुनियाद को प्रभावित कर सकता है।
AI पर रोक नहीं, लेकिन इंसानी निगरानी जरूरी
कोर्ट ने कहा कि AI एक उपयोगी तकनीक है, लेकिन हर न्यायिक निर्णय की अंतिम जिम्मेदारी इंसानों की ही होनी चाहिए। AI केवल सहायक हो सकता है, निर्णयकर्ता नहीं।
BCI को दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने Bar Council of India को AI के कानूनी उपयोग की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है। साथ ही ट्रिब्यूनल को मामले पर तथ्यों और वास्तविक कानूनी मिसालों के आधार पर दोबारा फैसला करने को कहा है।
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Supreme Court ने AI पर जताई चिंता, कहा- अंतिम फैसला इंसानों के हाथ में ही रहे
सुप्रीम कोर्ट ने NCLT के फैसले में AI से तैयार नकली कानूनी उदाहरणों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में अंतिम निर्णय इंसानों के हाथ में ही रहना चाहिए।

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