नई दिल्ली | 5 जुलाई 2026
देशभर में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले E20 पेट्रोल के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि इसके साथ ही सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से वाहन के इंजन को नुकसान होता है, माइलेज कम हो जाता है और मेंटेनेंस खर्च बढ़ जाता है। इन अफवाहों के बीच देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनियों ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है।
मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो, टीवीएस मोटर और हुंडई मोटर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि E20 पेट्रोल से इंजन को कोई नुकसान नहीं होता, बशर्ते वाहन निर्माता द्वारा निर्धारित मानकों का पालन किया जाए। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कई दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
E20 पेट्रोल क्या है?
E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार इसे बढ़ावा इसलिए दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो, प्रदूषण में कमी आए और किसानों को एथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सके।
क्या इंजन को होगा नुकसान?
वाहन निर्माताओं ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में लॉन्च किए जा रहे अधिकांश नए वाहन E20 कम्प्लायंट हैं। ऐसे वाहनों के इंजन और फ्यूल सिस्टम को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वे E20 ईंधन पर सुरक्षित रूप से चल सकें।
कंपनियों का कहना है कि व्यापक परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणन के बाद ही E20 को बाजार में लागू किया गया है। इसलिए E20 के कारण इंजन खराब होने या पार्ट्स जल्दी घिसने जैसी आशंकाओं का कोई ठोस आधार नहीं है।
पुराने वाहनों पर भी किया गया परीक्षण
मारुति सुजुकी के कॉर्पोरेट अफेयर्स के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती ने बताया कि कंपनी ने E10 के लिए डिजाइन की गई पुरानी गाड़ियों का भी E20 ईंधन के साथ परीक्षण किया।
उन्होंने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने करीब 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विस की। इनमें 1.5 करोड़ से अधिक वाहन तीन वर्ष से पुराने थे और तकनीकी रूप से E20 प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद किसी भी वाहन में E20 की वजह से जंग लगने, इंजन घिसने, पार्ट्स खराब होने या वाहन की उम्र कम होने जैसी कोई बड़ी समस्या सामने नहीं आई।
टोयोटा ने क्या कहा?
टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड एवं एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि ऑटोमोबाइल उद्योग दुनिया के सबसे अधिक नियंत्रित क्षेत्रों में शामिल है।
उन्होंने बताया कि किसी भी नए ईंधन या तकनीक को लागू करने से पहले वाहनों की स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा कड़े परीक्षण किए जाते हैं। उनके अनुसार एथेनॉल कोई नया ईंधन नहीं है। इसका उपयोग कई दशकों से हो रहा है और मोटरस्पोर्ट्स तथा फॉर्मूला रेसिंग में भी लंबे समय से किया जाता रहा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हाल ही में शुरू किए गए E85 फ्यूल स्टेशन केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं और सामान्य पेट्रोल वाहनों को वहां से ईंधन नहीं भरवाना चाहिए।
हीरो मोटोकॉर्प का दावा
हीरो मोटोकॉर्प के चीफ बिजनेस ऑफिसर आशुतोष वर्मा ने कहा कि कंपनी ने लाखों दोपहिया वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड और तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया है।
इस विश्लेषण में E20 ईंधन के कारण इंजन या अन्य मैकेनिकल पार्ट्स में अतिरिक्त नुकसान का कोई प्रमाण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि E20 पर चलने वाले वाहनों का प्रदर्शन सामान्य पेट्रोल पर चलने वाले वाहनों के बराबर पाया गया।
माइलेज पर कितना असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में थोड़ी कम होती है। इसलिए E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 2 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि यह अंतर वाहन की तकनीक, इंजन की स्थिति, ड्राइविंग स्टाइल और सड़क की परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
यदि कोई वाहन पहले 20 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता था, तो E20 पर यह लगभग 19 से 19.5 किलोमीटर प्रति लीटर तक आ सकता है। वाहन निर्माता इसे सामान्य और स्वीकार्य मानते हैं।
सरकार क्यों बढ़ा रही है E20 का उपयोग?
केंद्र सरकार का लक्ष्य देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ाकर पेट्रोलियम आयात पर खर्च कम करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाना है। सरकार का मानना है कि E20 के व्यापक उपयोग से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी।
निष्कर्ष
वाहन निर्माताओं का कहना है कि E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान होने की आशंका निराधार है। हालांकि माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इसके बदले देश को आयातित तेल पर निर्भरता कम करने, प्रदूषण घटाने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे बड़े फायदे मिलेंगे। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वाहन मालिक अपने वाहन निर्माता की गाइडलाइन के अनुसार ही ईंधन का उपयोग करें।




