नई दिल्ली, 24 सितंबर। रात में कमरे की लाइट या बेडसाइड लैंप जलाकर सोना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत हो सकती है। हालांकि, लगातार रोशनी के संपर्क में रहकर सोने से नींद और शरीर की प्राकृतिक दिन-रात की लय प्रभावित हो सकती है। कुछ शोधों में रात के समय रोशनी के संपर्क और ब्लड प्रेशर, मेटाबॉलिज्म तथा हृदय से जुड़े जोखिमों के बीच संबंध देखा गया है।

रात की रोशनी से मेलाटोनिन पर असर

शरीर में मेलाटोनिन एक ऐसा हार्मोन है जो नींद और शरीर की जैविक घड़ी को नियंत्रित करने में मदद करता है। रात में तेज रोशनी, खासकर आंखों के आसपास मौजूद रोशनी, मेलाटोनिन के सामान्य उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

इसका असर नींद की गुणवत्ता और शरीर की प्राकृतिक स्लीप साइकिल पर पड़ सकता है। हालांकि, केवल कमरे की रोशनी को सीधे हृदय रोग का कारण मानना सही नहीं होगा। हृदय की सेहत पर उम्र, खान-पान, व्यायाम, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और अन्य कई कारकों का भी असर होता है।

किन लोगों को ज्यादा ध्यान देना चाहिए?

जिन लोगों को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा या हृदय से जुड़ी समस्या है, उन्हें अच्छी नींद और नियमित स्लीप रूटीन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। रात में लगातार कृत्रिम रोशनी में रहने से नींद का पैटर्न प्रभावित हो सकता है, इसलिए सोने का वातावरण आरामदायक रखना उपयोगी है।

सोते समय कमरे को रखें अंधेरा

रात में सोते समय कमरे की गैर-जरूरी लाइट, टीवी और दूसरी स्क्रीन बंद रखना बेहतर माना जाता है। सोने और जागने का समय रोज लगभग एक जैसा रखने की कोशिश करें। कमरे को शांत और आरामदायक रखें।

अगर सुरक्षा के कारण रात में रोशनी जरूरी है, तो कम ब्राइटनेस वाली हल्की लाइट का इस्तेमाल करें और उसे सीधे आंखों के पास रखने से बचें। लगातार नींद की समस्या या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।