नई दिल्ली | 13 जुलाई 2026

रसोई में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों को हम अक्सर सालों तक बिना जांचे-परखे इस्तेमाल करते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर बर्तन की एक उपयोगी उम्र होती है? समय के साथ बर्तनों में घिसावट, दरार, जंग, खरोंच या सतह खराब होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ऐसे बर्तनों का लगातार इस्तेमाल स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों के लिए ठीक नहीं माना जाता। इसलिए विशेषज्ञ समय-समय पर किचन के बर्तनों की जांच करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें बदलने की सलाह देते हैं।

एल्युमिनियम के बर्तन कब बदलें?

एल्युमिनियम के बर्तन हल्के और किफायती होते हैं, लेकिन अगर उनकी सतह बहुत ज्यादा घिस जाए, बर्तन पतला हो जाए या अंदरूनी हिस्सा खराब दिखने लगे, तो उसे बदल देना चाहिए। विशेष रूप से खट्टी चीजें बार-बार पकाने से इनकी सतह जल्दी प्रभावित हो सकती है।

प्लास्टिक कंटेनर और बोतलों पर रखें नजर

यदि प्लास्टिक के डिब्बों या बोतलों पर गहरी खरोंचें पड़ गई हों, उनका रंग बदल गया हो या उनमें से दुर्गंध आने लगे, तो उनका उपयोग बंद कर देना बेहतर होता है। पुराने और क्षतिग्रस्त प्लास्टिक कंटेनर खाद्य पदार्थों के सुरक्षित भंडारण के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।

तांबा, पीतल और लकड़ी के बर्तनों की भी करें जांच

तांबे और पीतल के बर्तनों की अंदरूनी कलई घिस जाए या हरे-काले निशान दिखाई दें, तो दोबारा कलई करवाने के बाद ही उनका उपयोग करें। वहीं लकड़ी के चम्मच और चॉपिंग बोर्ड में गहरे कट, दरार या फफूंदी के संकेत दिखें, तो उन्हें बदल देना चाहिए क्योंकि इनमें बैक्टीरिया पनपने की संभावना बढ़ जाती है। मेलामाइन की प्लेटों और बाउल में दरार या टूट-फूट दिखाई दे तो उन्हें भी बदल देना ही सुरक्षित माना जाता।

समय पर बदलाव है समझदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि रसोई के बर्तनों की नियमित जांच अच्छी आदत है। यदि किसी बर्तन में स्पष्ट घिसावट, टूट-फूट या गुणवत्ता में कमी दिखाई दे रही हो, तो उसे समय रहते बदल देना बेहतर होता है। इससे रसोई की स्वच्छता बनी रहती है और भोजन तैयार करने की गुणवत्ता भी सुरक्षित रहती है।

नोट: यह जानकारी सामान्य घरेलू देखभाल और स्वच्छता संबंधी सलाह पर आधारित है। यदि किसी बर्तन की सुरक्षा को लेकर संदेह हो, तो निर्माता के निर्देशों का पालन करें।