रायपुर, 16 अगस्त। कभी हाथों में बंदूक थामे संघर्ष के रास्ते पर चलने वाली बस्तर की पूर्व महिला नक्सलियों ने अब रैंप पर आत्मविश्वास के साथ कदम बढ़ाकर बदलाव की नई कहानी पेश की। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में इन महिलाओं ने पारंपरिक साड़ियों और कोसा सिल्क के परिधानों में रैंप वॉक किया। तालियों के बीच उनका आत्मविश्वास और मुस्कान कार्यक्रम का खास आकर्षण रहा।
बंदूक से हुनर और नई पहचान तक का सफर
रैंप पर नजर आईं महिलाओं की कहानी महज फैशन शो तक सीमित नहीं रही। यह उनके अतीत को पीछे छोड़कर मुख्यधारा में लौटने और नई पहचान बनाने की कोशिश की तस्वीर भी बनी। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने यह संदेश दिया कि बदलाव का रास्ता नए अवसरों और आत्मविश्वास से होकर गुजरता है।
बस्तर की संस्कृति को मिला मंच
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक बुनकरी, हैंडलूम और कोसा सिल्क को प्रमुखता दी गई। बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक पहनावे को रैंप के माध्यम से लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया। महिलाओं के परिधानों में स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक रंगों की झलक साफ दिखाई दी।
सादगी में दिखा आत्मविश्वास
रैंप वॉक के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक साड़ियों के साथ सिल्वर ज्वेलरी, झुमके और देसी अंदाज को अपनाया। उनका लुक भले ही सादगी से भरा रहा, लेकिन आत्मविश्वास ने पूरे आयोजन को खास बना दिया। कैमरों और दर्शकों के सामने बेझिझक चलते हुए महिलाओं ने अपनी बदली हुई जिंदगी की झलक पेश की।
नई शुरुआत का प्रतीक बना आयोजन
पूर्व महिला नक्सलियों के लिए यह मंच सामाजिक मुख्यधारा में लौटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा गया। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि किसी व्यक्ति का अतीत उसकी पूरी पहचान तय नहीं करता। सही अवसर और सकारात्मक दिशा मिलने पर जीवन में नई शुरुआत संभव है।
सोशल मीडिया पर भी चर्चा
इस खास मौके की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे। फेमिना मिस इंडिया ईस्ट 2026 डॉ. अनुष्का सोने ने भी अपने इंस्टाग्राम रील के जरिए इस अनुभव को साझा किया। कार्यक्रम ने बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के साथ बदलाव और नई उम्मीद की कहानी को भी सामने रखा।




