नई दिल्ली, 19 अगस्त। रिश्तों में छोटी-छोटी पसंद और नापसंद को लेकर होने वाली बहस आम है। खासकर खाने को लेकर कपल्स के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि आज क्या खाया जाए। किसी को घर का सादा खाना पसंद होता है, तो किसी का मन बाहर का खाना खाने का होता है। ऐसे में इन दिनों ‘Food Divorce’ नाम का एक रिलेशनशिप ट्रेंड चर्चा में है। इसका मतलब रिश्ता खत्म करना नहीं, बल्कि खाने की पसंद को लेकर एक-दूसरे को आजादी देना है।
क्या होता है ‘Food Divorce’?
फूड डिवोर्स का सीधा मतलब है कि कपल्स को हर बार एक जैसा खाना खाने या एक ही समय पर भोजन करने की जरूरत नहीं है। अगर एक पार्टनर दाल-चावल खाना चाहता है और दूसरा पिज्जा या नूडल्स, तो दोनों अपनी पसंद के मुताबिक खाना चुन सकते हैं।
खाने को लेकर रोज की बहस से राहत
कई कपल्स के बीच रोजाना यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि घर पर खाना बनेगा या बाहर से ऑर्डर किया जाएगा। लगातार होने वाली ऐसी छोटी बहस धीरे-धीरे तनाव का कारण बन सकती है। अपनी-अपनी पसंद का खाना चुनने से इस तरह की अनावश्यक बहस कम हो सकती है।
हर बार समझौता करना जरूरी नहीं
रिश्ते में समझौता जरूरी हो सकता है, लेकिन हर छोटी पसंद पर अपनी इच्छा छोड़ना भी जरूरी नहीं। अगर दोनों की पसंद अलग है, तो दोनों अपनी पसंद का भोजन कर सकते हैं। वहीं किसी दिन मन एक जैसा हो तो साथ बैठकर खाना भी खाया जा सकता है।
अलग डाइट भी हो सकती है वजह
कपल्स की खाने की आदत अलग होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। किसी को हल्का खाना पसंद हो सकता है, तो कोई मसालेदार भोजन पसंद कर सकता है। फिटनेस, डाइट या कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज भी अलग-अलग भोजन चुनने की वजह बन सकता है।
क्या इससे रिश्ता कमजोर होता है?
अलग खाना खाने का मतलब यह नहीं कि रिश्ते में दूरी बढ़ रही है। अगर दोनों के बीच बातचीत, सम्मान और साथ समय बिताने की आदत बनी हुई है, तो खाने की अलग पसंद कोई बड़ी समस्या नहीं है। हालांकि, अगर भोजन के साथ-साथ बातचीत और साथ समय बिताना भी लगातार कम हो रहा है, तो रिश्ते पर ध्यान देना जरूरी है।
‘Food Divorce’ का असली मतलब
फूड डिवोर्स को रिश्ते में दूरी के बजाय खाने की पसंद की स्वतंत्रता के रूप में समझा जा सकता है। कपल्स अपनी पसंद का खाना खाते हुए भी एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं। आखिरकार रिश्ते की मजबूती इस बात से तय नहीं होती कि दोनों क्या खाते हैं, बल्कि इस बात से होती है कि वे एक-दूसरे की पसंद और जरूरतों का कितना सम्मान करते हैं।




